एसीएस साहब की ताजपोशी, भाई की भी बल्ले-बल्ले : नेताजी के बाद अब हाईकोर्ट भी एसपी से नाराज : कलेक्टर साहब की वीकएंड पार्टियां

मध्यप्रदेश की अफसरशाही में इन दिनों कई मामले चर्चा में हैं। एसीएस की नई जिम्मेदारी, एसपी की हाईकोर्ट से नाराजगी, कलेक्टर की वीकएंड पार्टियां, युवा IPS का कैडर बदलाव और माइनिंग अफसर की सैलरी-फीस का मामला सुर्खियों में है।
 एसीएस साहब की ताजपोशी, भाई की भी बल्ले-बल्ले : नेताजी के बाद अब हाईकोर्ट भी एसपी से नाराज : कलेक्टर साहब की वीकएंड पार्टियां
1 एसीएस साहब की ताजपोशी, भाई की भी बल्ले-बल्ले
लंबे समय से लूप लाइन में चल रहे एसीएस स्तर के एक साहब को आखिरकार बड़े विभाग की जिम्मेदारी मिल ही गई है। साहब काफी समय से किसी बड़े और महत्वपूर्ण विभाग की कमान संभालने के लिए प्रयासरत थे। अब सरकार ने उनकी यह इच्छा पूरी कर दी है। लेकिन मजेदार बात यह है कि साहब से ज्यादा खुशी उनके छोटे भाई को हुई है। वजह भी खास है। जिस विभाग की कमान अब बड़े भाई के हाथ में आई है, उसी विभाग में छोटे भाई की बतौर वेंडर अच्छी-खासी मौजूदगी है। ऐसे में बड़े भाई की नई कुर्सी का फायदा छोटे भाई को मिलने की उम्मीद स्वाभाविक तौर पर बढ़ गई है। अब विभाग में छोटे भाई को काम मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी तो भुगतान की प्रक्रिया भी आसान रहने की उम्मीद है। यही वजह है कि साहब की नई जिम्मेदारी को लेकर परिवार में खुशी का माहौल कुछ ज्यादा ही नजर आ रहा है। हालांकि, सरकारी व्यवस्था में रिश्तेदारी और कारोबार के बीच दूरी बनाए रखना जरूरी माना जाता है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि बड़े साहब अपनी नई कुर्सी पर बैठकर छोटे भाई से कितनी दूरी बनाए रखते हैं और विभागीय कामकाज में भाई की वेंडर वाली भूमिका कितनी ‘सामान्य’ बनी रहती है। कुल मिलाकर, बड़े भाई को मिली कुर्सी और छोटे भाई को मिलने वाला कारोबार—दोनों का टाइमिंग एकदम सही बैठ गया है।

2 नेताजी के बाद अब हाईकोर्ट भी एसपी से नाराज
एक जिले में पदस्थ युवा आईपीएस साहब इन दिनों एक के बाद एक मुश्किलों से घिरते नजर आ रहे हैं। एसपी की कुर्सी संभालने के बाद से ही साहब के लिए हालात कुछ खास आसान नहीं रहे। पहले सत्ताधारी दल के एक दिग्गज नेता के समर्थकों से पुलिस की झड़प ने मामला गर्म कर दिया था। बताया जाता है कि इससे नाराज नेताजी ने साहब को देख लेने तक की चेतावनी दे डाली थी। अब इसी बीच हाईकोर्ट की नाराजगी ने साहब की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। मामला एक व्यक्ति का नाम निगरानी सूची से हटाने से जुड़ा है। कोर्ट ने एसपी साहब को स्पष्ट निर्देश दिए थे, लेकिन आदेश का पालन नहीं होने पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी कर दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि एसपी साहब या तो कोर्ट के निर्देशों को समझ नहीं पा रहे हैं या फिर जानबूझकर उनकी अवहेलना कर रहे हैं। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद पुलिस महकमे में भी साहब की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक तरफ सत्ताधारी दल के ताकतवर नेता की नाराजगी और दूसरी तरफ हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी—यानी साहब के लिए मुश्किलें दोनों तरफ से खड़ी होती नजर आ रही हैं।

3 कलेक्टर साहब की वीकएंड पार्टियां
सीधी भर्ती के एक युवा आईएएस इन दिनों जिले में प्रशासन से ज्यादा अपनी ‘पॉलिटिकल मैनेजमेंट’ को लेकर चर्चा में हैं। साहब जिले के कलेक्टर बने रहना चाहते हैं, लिहाजा छुटभैया नेताओं से भी नजदीकी बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो वीकएंड आते ही किसी न किसी नेता के साथ साहब की महफिल जम जाती है। दिलचस्प बात यह है कि पार्टी की मेजबानी की जिम्मेदारी भी जिले में पदस्थ किसी विभाग प्रमुख के कंधों पर डाल दी जाती है। इंतजाम से लेकर खर्चे तक की व्यवस्था विभाग प्रमुख को करनी पड़ती है। अब बेचारे विभाग प्रमुखों की शिकायत है कि सरकारी काम के साथ-साथ उन्हें साहब की ‘पॉलिटिकल नेटवर्किंग’ का खर्चा भी उठाना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि साहब का मकसद साफ है—स्थानीय नेताओं को खुश रखिए और बदले में सीनियर स्तर तक अपने पक्ष में फीडबैक पहुंचवाइए। हालांकि, साहब को शायद यह याद नहीं कि जिले की कमान संभालते वक्त उन्होंने बड़े आत्मविश्वास से कहा था कि उन पर किसी नेता का दबाव नहीं चलता।

4 केरल कैडर से प्रदेश आएंगे युवा आईपीएस, शादी बनी तबादले की वजह
केरल कैडर के एक युवा आईपीएस जल्द ही प्रदेश में नजर आ सकते हैं। सरकार ने उनके प्रदेश कैडर में आने की मंजूरी दे दी है और अब औपचारिक आदेश जारी होने का इंतजार है। खास बात यह है कि साहब के प्रदेश आने के पीछे कोई प्रशासनिक जरूरत से ज्यादा रिश्ते का कनेक्शन काम कर रहा है। दरअसल, प्रदेश कैडर में चयनित एक युवा आईएएस की शादी केरल कैडर के इस आईपीएस से तय हुई है। शादी के बाद दोनों अफसरों को एक ही प्रदेश में काम करने का रास्ता साफ करने के लिए कैडर परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी आधार पर प्रदेश सरकार ने युवा आईपीएस के यहां आने को मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि सरकार की मंजूरी मिलने के बाद अब केवल औपचारिकताएं बाकी हैं। जल्द ही आईपीएस साहब के प्रदेश आने का आदेश भी जारी हो सकता है। यानी आने वाले दिनों में प्रदेश की अफसरशाही में एक और ‘ऑफिसर कपल’ की एंट्री होने वाली है।

5 सिर्फ आईएएस नहीं, इंजीनियर भी श्रेय के हकदार
आईएएस अफसरों के व्हाट्सऐप ग्रुप में पिछले दिनों पानी से जुड़े एक बड़े प्रोजेक्ट को लेकर ऐसी चर्चा चली कि कई पुराने राज खुलते-खुलते रह गए। मामला उस प्रोजेक्ट की सफलता का था, जिसकी शुरुआत एक रिटायर्ड आईएएस के कार्यकाल में हुई थी। साहब ने प्रोजेक्ट की तारीफ करते हुए ग्रुप में एक पोस्ट क्या डाली, फिर तो रिटायर्ड अफसरों की यादें भी ताजा हो गईं। एक के बाद एक पूर्व आईएएस अफसर प्रोजेक्ट की उपलब्धियां गिनाने लगे और उसके लिए तत्कालीन अफसरों की तारीफ में जुट गए। इनमें कई पूर्व चीफ सेक्रेट्री भी शामिल थे। किसी ने अपनी भूमिका याद की तो किसी ने अपने कार्यकाल में लिए गए फैसलों का जिक्र कर दिया। देखते ही देखते प्रोजेक्ट की सफलता का श्रेय अफसरशाही के खाते में जाता दिखाई देने लगा। इसी बीच ग्रुप में एंट्री हुई एक और पूर्व चीफ सेक्रेट्री की। साहब ने तारीफों के इस सिलसिले को कुछ अलग ही नजरिए से देखा और ऐसा कमेंट कर दिया, जिसने पूरी चर्चा का रुख ही बदल दिया। साहब ने साफ शब्दों में याद दिलाया कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को सिर्फ आईएएस अफसरों के प्रयास से पूरा नहीं किया जा सकता। इसके पीछे बड़ी संख्या में इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी भी काम करते हैं। उन्होंने खास तौर पर उन इंजीनियरों का जिक्र किया, जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात मेहनत की और प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाई। पूर्व चीफ सेक्रेट्री ने यहां तक सुझाव दे दिया कि सरकार को ऐसे इंजीनियरों की मेहनत को भी पहचानना चाहिए और उन्हें प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित करना चाहिए। बस, साहब का यह कमेंट आते ही ग्रुप का माहौल बदल गया। कुछ देर पहले तक जहां प्रोजेक्ट की उपलब्धियों और अफसरों के योगदान पर लगातार पोस्ट आ रही थीं, वहीं अचानक सन्नाटा छा गया। न किसी ने आगे श्रेय लेने की कोशिश की और न ही किसी ने इंजीनियरों के योगदान पर बहस आगे बढ़ाई।

6 विदेश यात्रा पर जाएंगी सीनियर आईपीएस मैडम
प्रदेश की एक सीनियर आईपीएस मैडम जल्द ही विदेश यात्रा पर रवाना होने वाली हैं। करीब एक सप्ताह की इस यात्रा के लिए मैडम ने सरकार से अनुमति मांगी थी और अब सरकार ने भी हरी झंडी दे दी है। बताया जा रहा है कि मैडम की यह यात्रा पूरी तरह निजी है, यानी इसका सरकारी दौरे या किसी आधिकारिक कार्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं है। सरकार की अनुमति मिलते ही मैडम की यात्रा का रास्ता साफ हो गया है। अब जल्द ही वे निजी काम से विदेश रवाना होंगी और करीब एक सप्ताह बाद वापस लौटेंगी। वैसे मैडम की विदेश यात्रा से ज्यादा चर्चा इन दिनों उनकी अगली बड़ी जिम्मेदारी को लेकर है। माना जा रहा है कि मैडम प्रदेश के एक बड़े पद पर नजर बनाए हुए हैं और इसके लिए अपने स्तर पर प्रयास भी कर रही हैं। ऐसे में विदेश यात्रा पर जाने से पहले मिली सरकारी अनुमति को भी लोग अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। हालांकि निजी यात्रा का उनकी प्रशासनिक दावेदारी से कोई सीधा संबंध नहीं है,।

7 पीएस हुए नाराज तो प्रमोटी आईएएस ने ओएसडी की लगाई क्लास
एक प्रमुख सचिव की समीक्षा बैठक में बड़े संस्थान की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रमोटी आईएएस को ऐसी फटकार लगी कि साहब का मूड ही खराब हो गया। पीएस ने संस्थान के कामकाज पर सवाल उठाते हुए साफ कह दिया कि व्यवस्था ठीक नहीं चल रही है, हर तरफ अव्यवस्थाएं नजर आ रही हैं और आप संस्थान संभाल ही नहीं पा रहे हैं। बैठक में पीएस की खरी-खोटी सुनने के बाद प्रमोटी आईएएस ने उस समय तो किसी तरह खुद को संभाले रखा, लेकिन बैठक खत्म होते ही उनका गुस्सा बाहर आ गया। साहब ने बाहर निकलते ही विभाग के ओएसडी को फोन लगाया और जमकर क्लास लगा दी। दरअसल, प्रमोटी आईएएस को शक है कि संस्थान के कामकाज को लेकर पीएस के कान भरने वाला कोई और नहीं, बल्कि यही ओएसडी है। साहब को लगता है कि ओएसडी की रिपोर्टिंग के चलते ही पीएस के सामने उनकी ऐसी तस्वीर पेश हुई, जिसके कारण उन्हें समीक्षा बैठक में फटकार सुननी पड़ी। अब प्रमोटी आईएएस ने अपना गुस्सा सीधे ओएसडी पर निकाल दिया। फोन पर साहब ने खूब खरी-खोटी सुनाई और यह तक जता दिया कि अगर किसी ने उनके खिलाफ गलत फीडबैक दिया है तो उसका हिसाब भी लिया जाएगा। मजेदार बात यह है कि पीएस ने बैठक में संस्थान की व्यवस्था पर सवाल उठाए थे, लेकिन बैठक से बाहर आते-आते मामला संस्थान से निकलकर ओएसडी तक पहुंच गया। 

8 एसएएस अफसरों के ग्रुप में नॉन-एसएएस को आईएएस बनाने पर बहस
प्रदेश में एक बार फिर नॉन-एसएएस अफसरों को आईएएस अवार्ड देने की प्रक्रिया को लेकर हलचल शुरू हो गई है। करीब दस साल पहले राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में पदस्थ चार नॉन-एसएएस अफसरों को आईएएस बनाया था। इसके बाद से प्रदेश में यह प्रक्रिया लगभग पूरी तरह ठप है, जबकि कई अन्य राज्यों में नॉन-एसएएस अफसरों को आईएएस अवार्ड देने की प्रक्रिया लगातार चल रही है। अब प्रदेश में नए बड़े साहब के काम करने के तरीके को देखते हुए एक बार फिर यह उम्मीद जताई जाने लगी है कि नॉन-एसएएस अफसरों को आईएएस अवार्ड देने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। बड़े साहब की कार्यशैली को लेकर कहा जाता है कि वे हर काम को सकारात्मक नजरिए से देखते हुए उसे पूरा कराने में भरोसा रखते हैं। ऐसे में लंबे समय से रुकी इस प्रक्रिया के दोबारा शुरू होने की संभावना ने एसएएस अफसरों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच एसएएस से आईएएस अवार्ड पाने वाले एक अफसर ने पिछले दिनों ‘एसएएस फैमिली’ नाम से बने व्हाट्सएप ग्रुप में इस प्रक्रिया से जुड़ी एक खबर पोस्ट कर दी। बस, इसके बाद ग्रुप में नई बहस शुरू हो गई। कुछ अफसरों ने नॉन-एसएएस को आईएएस बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया। इन अफसरों का तर्क है कि नॉन-एसएएस अफसरों को आईएएस बनाने की प्रक्रिया में योग्यता और अनुभव से ज्यादा पसंद-नापसंद हावी हो सकती है। उनका आरोप है कि कई बार चेहरा देखकर अपने लोगों को उपकृत करने के लिए इस तरह की व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है।

 9 माइनिंग अफसर की सैलरी 50 हजार, बेटे की फीस 9 लाख
बड़े जिले में पदस्थ एक माइनिंग अफसर इन दिनों अपनी सैलरी और बेटे की स्कूल फीस के गणित को लेकर चर्चा में हैं। मामला इतना दिलचस्प है कि इसकी चर्चा अब दफ्तरों से निकलकर हाईकोर्ट तक पहुंच गई है। दरअसल, अफसर की मासिक सैलरी करीब 50 हजार रुपये बताई गई है। यानी सालभर में उनकी कुल सैलरी लगभग छह लाख रुपये बैठती है। दूसरी तरफ उनके बेटे की जिस स्कूल में पढ़ाई चल रही है, वहां की सालाना फीस करीब नौ लाख रुपये है। यानी बेटे की फीस ही अफसर की सालाना सैलरी से करीब तीन लाख रुपये ज्यादा है। यह सवाल हाईकोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान उठा। सुनवाई के दौरान जज साहब ने जब अफसर से पूछा कि आखिर यह गणित कैसे बैठता है, तो साहब ने बड़ा सहज जवाब दिया—बेटे की फीस उसके मामा भरते हैं। साहब का जवाब सुनकर मामला वहीं खत्म नहीं हुआ। जज को भी इस स्पष्टीकरण पर पूरी तरह भरोसा नहीं हुआ और उन्होंने अफसर से इस संबंध में दस्तावेज पेश करने को कहा है।  वैसे संबंधित अफसर का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आता रहा है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगने की बात कही जाती रही है। हालांकि इन आरोपों का अंतिम निष्कर्ष अलग-अलग मामलों में प्रक्रिया और दस्तावेजों पर निर्भर करता है। अफसर पर यह भी आरोप लगते रहे हैं कि विवाद सामने आने के बाद वे किसी न किसी तरह उससे निकल जाते हैं।

10 कलेक्टर का प्रण, जिले को चंबल नहीं बनने दूंगा
बड़े जिले में कलेक्टर के तौर पर पदस्थ एक प्रमोटी आईएएस इन दिनों अपने एक बयान को लेकर खूब चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साहब मंच से दो टूक अंदाज में कहते नजर आ रहे हैं—“जिले को चंबल नहीं बनने दूंगा। अब साहब के इस प्रण के पीछे की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। दरअसल, एक कार्यक्रम में एक सरपंच ने कलेक्टर साहब पर आरोप लगाया कि वे उनकी बंदूक बदलने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। सरपंच का दावा था कि इस काम के लिए वे पूर्व मुख्यमंत्री तक से सिफारिश करवा चुके हैं, लेकिन फाइल है कि आगे बढ़ने का नाम ही नहीं ले रही। सरपंच की शिकायत का जवाब कलेक्टर साहब ने उसी मंच से अपने अंदाज में दिया और कह दिया कि जिले को चंबल नहीं बनने देंगे। साहब वैसे फाइलों को तेजी से निपटाने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन बंदूक के लाइसेंस या उससे जुड़ी अनुमति के मामले में उनकी रफ्तार अचानक बेहद धीमी बताई जा रही है।

Abhishek Dubey

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