MP Laptop Distribution 2026: CM मोहन यादव ने 1.21 लाख छात्रों को दिए ₹25 हजार, जानें पूरी योजना

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MP Laptop Distribution 2026: CM मोहन यादव ने 1.21 लाख छात्रों को दिए ₹25 हजार, जानें पूरी योजना
भोपाल। मध्य प्रदेश में मेधावी विद्यार्थियों के लिए आयोजित लैपटॉप वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छात्रों को सफलता और संघर्ष का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि अच्छे अंक हासिल करना निश्चित तौर पर उपलब्धि है, लेकिन सफलता को सिर पर नहीं चढ़ने देना चाहिए। जीवन में असफलता आए तो निराश होने के बजाय अपनी गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, चुनौतियों का सामना करने और शिक्षा के साथ नॉलेज एवं स्किल विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा, “आज लर्न करोगे तो कल अर्न करोगे।”

1.21 लाख विद्यार्थियों को मिला लैपटॉप योजना का लाभ

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप से 10 मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप प्रदान किए। वहीं 1 लाख 21 हजार 804 पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि ट्रांसफर की गई।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप देने की योजना की शुरुआत महज 473 विद्यार्थियों से हुई थी। अब इसका दायरा बढ़कर 1.21 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि लैपटॉप सिर्फ एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए डिजिटल लर्निंग, ई-लाइब्रेरी और उच्च शिक्षा के नए अवसरों का माध्यम है।

CM ने सुनाया संघर्ष के दिनों का किस्सा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब उन्हें गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर मिलने वाले लड्डू के लिए भी इंतजार करना पड़ता था।

उन्होंने विद्यार्थियों को मेहनत और सीखने पर ध्यान देने की सलाह देते हुए कहा कि आज का ज्ञान और कौशल भविष्य में सफलता की नींव बन सकता है।

‘पत्थर चोट सहता है, तभी मूर्ति बनता है’

विद्यार्थियों को जीवन में आने वाली चुनौतियों का महत्व समझाने के लिए मुख्यमंत्री ने पत्थर और मूर्तिकार का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि जिस पत्थर में छेनी और हथौड़े की चोट सहने की क्षमता होती है, वही आगे चलकर सुंदर मूर्ति का रूप लेता है और मंदिर में सम्मान पाता है। इसी तरह जीवन की कठिन परिस्थितियां भी व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं।

मुख्यमंत्री ने खेल का उदाहरण देते हुए कहा कि जो खिलाड़ी मैदान में उतरता है, वही हार सकता है और वही जीतने का सपना भी देख सकता है। इसलिए विद्यार्थियों को असफलता से डरने के बजाय प्रयास करते रहना चाहिए।

97.2% अंक वाले धीरेंद्र का UPSC और राजनीति का लक्ष्य

कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के साथ अपनी भविष्य की योजनाएं भी साझा कीं। 12वीं में 97.2 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले धीरेंद्र सिंह मुंडेला ने बताया कि उनका पहला लक्ष्य UPSC की तैयारी करना है। इसके बाद वे राजनीति में आकर देश के विकास में योगदान देना चाहते हैं।

उन्होंने बताया कि लोगों के बीच घूमने और उनकी समस्याओं को करीब से देखने के बाद उनके मन में राजनीति में आने की इच्छा पैदा हुई।

वहीं 95 प्रतिशत अंक हासिल करने वाली हिमांशी पाठक ने भविष्य में एंटरप्रेन्योर बनने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि शुरुआत में एयर होस्टेस के रूप में काम करने के बाद खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं। उनका लक्ष्य नौकरी पाने के साथ-साथ दूसरों को रोजगार देने वाला बनना है।

CM बोले- डॉक्टर, इंजीनियर के साथ अच्छे किसान और राजनेता भी चाहिए

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में केवल डॉक्टर, इंजीनियर या वकील बनने का ही लक्ष्य न रखें। देश को अच्छे किसान और योग्य राजनेताओं की भी जरूरत है।

उन्होंने कहा कि किसान देश के लिए अन्न पैदा करता है, इसलिए उसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसी तरह पढ़े-लिखे और योग्य युवाओं के राजनीति में आने से बेहतर नेतृत्व तैयार हो सकता है।

मुख्यमंत्री ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और प्राचार्यों की मेहनत की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कमजोर शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों को भी मेहनत और मार्गदर्शन के जरिए बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए तैयार किया जा रहा है।

सरकारी स्कूलों में बढ़ा भरोसा, ड्रॉपआउट में कमी का दावा

परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है और ड्रॉपआउट में लगातार कमी आई है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में करीब 1.21 लाख विद्यार्थियों ने 12वीं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या करीब 92 हजार थी।

मंत्री के अनुसार, लैपटॉप योजना शुरू होने के बाद अब तक करीब 6 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिल चुका है और सरकार इस योजना पर लगभग 1,620 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।

2009-10 में शुरू हुई थी लैपटॉप योजना

मंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों को लैपटॉप उपलब्ध कराने की योजना की शुरुआत वर्ष 2009-10 में हुई थी। शुरुआत में योजना का लाभ लेने के लिए 85 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी था। बाद में पात्रता सीमा को घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया।

इस बदलाव के बाद योजना के दायरे में आने वाले विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

18 हजार शिक्षकों की भर्ती की तैयारी

स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश में शिक्षकों के करीब 18 हजार रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। भर्ती में आरक्षण, बैकलॉग और अन्य निर्धारित नियमों का पालन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि खाली पदों को भरना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
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