MP में डीएफओ अब कलेक्टर के कंट्रोल में? वन विभाग का सख्त आदेश - हर हाल में TL बैठक में आना होगा खुद, जूनियर को नहीं भेज सकेंगे
मध्य प्रदेश वन विभाग ने सभी सामान्य वनमंडलों के DFO को कलेक्टर की समय-सीमा बैठक में स्वयं उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। DFO अब बैठक में अधीनस्थ अधिकारी को प्रतिनिधि बनाकर नहीं भेज सकेंगे। वनभूमि से जुड़े विकास कार्यों के मामलों में त्वरित समन्वय और निराकरण के निर्देश भी दिए गए हैं।

भोपाल। मध्यप्रदेश में वन विभाग ने एक ऐसा आदेश जारी किया है, जिसने पूरे ब्यूरोक्रेसी में हलचल मचा दी है। इस आदेश को DFO को जिला कलेक्टर के नियंत्रण में लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। मंत्रालय वल्लभ भवन से 20 अगस्त 2026 को जारी हुए इस आदेश में साफ कहा गया है कि अब जिले के सभी वनमंडलाधिकारी (DFO) को कलेक्टर की समय-सीमा (TL) बैठक में खुद ही उपस्थित होना पड़ेगा।
आदेश में क्या है? 3 बड़े निर्देश
मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल द्वारा जारी आदेश क्रमांक एफ 1/14/0007/2026-Sec-4-10 भोपाल, दिनांक 20-08-2026 में समस्त वनमंडलाधिकारियों के लिए 3 निर्देश दिए गए हैं -
1. प्रतिनिधि नहीं चलेगा, खुद आना होगा: जिले में सामान्य वनमंडल के सभी वनमंडलाधिकारी कलेक्टर की समय-सीमा की बैठक में स्वयं उपस्थित होना सुनिश्चित करेंगे। इस बैठक में वनमंडलाधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में अधीनस्थ अमले को नहीं भेजेंगे।
2. वनभूमि वाले मामलों में तुरंत समन्वय: जिले के विभिन्न विभागों के मुद्दों को विशेषकर विकास कार्यों के संबंध में जिसमें वनभूमि प्रभावित हो रही है, संबंधित विभाग से त्वरित सम्पर्क कर उसका निराकरण करवायेंगे। यानी अब सड़क, बिल्डिंग, खनन जैसे काम में वनभूमि आड़े आ रही है तो DFO को कलेक्टर के साथ बैठकर तुरंत रास्ता निकालना होगा।
3. आपसी समन्वय से निराकरण: वन विभाग के ऐसे बिंदु जिनका अन्य विभागों से या जिला प्रशासन से संबंध है, उनका आपसी समन्वय से निराकरण सुनिश्चित करेंगे।
आदेश की कॉपी PCCF एवं वन बल प्रमुख और प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को भी भेजी गई है।
क्यों अहम है ये आदेश? कलेक्टर लिखेंगे DFO की CR?
वन विभाग हमेशा से खुद को एक अलग और स्वतंत्र विभाग मानता रहा है। DFO सीधे PCCF और भोपाल को रिपोर्ट करते हैं, कलेक्टर को नहीं। लेकिन पिछले कई सालों से सरकार DFO को कलेक्टर के अधीन लाने की कोशिश कर रही है।
आपको याद होगा, पहले भी कोशिश हुई थी कि DFO की वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (CR) कलेक्टर लिखेंगे। इसका प्रस्ताव भी बना था, क्योंकि जिले में कलेक्टर ही सरकार का मुख्य प्रतिनिधि होता है। लेकिन वन अधिकारियों के भारी विरोध के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
अब नए आदेश के जरिए फिर से उसी दिशा में कदम बढ़ाया गया है। जानकारों का कहना है -
जब DFO हर सोमवार TL बैठक में कलेक्टर के सामने बैठेगा, अपनी परफॉर्मेंस बताएगा, तो एक तरह से वह कलेक्टर की मॉनिटरिंग में आ ही जाएगा। वनभूमि के अतिक्रमण, पेड़ कटाई, कैम्पा फंड, टाइगर रिजर्व के बफर के काम - इन सब पर कलेक्टर सीधा सवाल पूछ सकेंगे।
जमीनी हकीकत क्या है?
कई जिलों में DFO महीनों तक कलेक्टर की बैठक में नहीं आते थे। अपने रेंजर या SDO को भेज देते थे। इससे कई विकास कार्य - जैसे जल जीवन मिशन की पाइपलाइन, PM सड़क, बिजली लाइन - वन विभाग की NOC न मिलने से लटके रहते थे। कलेक्टरों की लगातार शिकायत के बाद ही शासन को ये आदेश निकालना पड़ा है।
अब देखना होगा कि इस आदेश का कितना पालन होता है, या ये भी पिछली बार की तरह सिर्फ कागजों में रह जाएगा।





