आईएएस मैडम ने प्रिय बाबू को लगाई फटकार : प्रदेश के “अजीत डोभाल” बनेंगे सीनियर आईपीएस अफसर! : कलेक्टर साहब आसानी से नहीं करते किसी पर भरोसा!

MP IAS-IPS Gossip: मध्यप्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में तबादले, पोस्टिंग, DPC, वरिष्ठता और अफसरों के बीच तालमेल को लेकर हलचल। पढ़िए IAS-IPS से जुड़े 10 बड़े गॉसिप अपडेट।
आईएएस मैडम ने प्रिय बाबू को लगाई फटकार :  प्रदेश के “अजीत डोभाल” बनेंगे सीनियर आईपीएस अफसर! : कलेक्टर साहब आसानी से नहीं करते किसी पर भरोसा!
1 आईएएस मैडम ने प्रिय बाबू को लगाई फटकार
सीधी भर्ती वाली एक आईएएस मैडम की अपने विभाग के एक बाबू पर कुछ ज्यादा ही कृपा बताई जाती है। बाबू भी ऐसे कि मैडम की उम्मीदों पर खरा उतरने में कोई कसर नहीं छोड़ते। लेकिन पिछले दिनों बाबू की एक हरकत ने मैडम को ही अपने सीनियर अफसर की डांट का सामना करा दिया। बताया जाता है कि सीनियर के चैंबर से बाहर निकलते ही मैडम का पारा चढ़ा हुआ था। सीधे अपने चैंबर पहुंचीं और प्रिय बाबू को तलब कर लिया। फिर बाबू की जमकर क्लास लगी। गुस्से में मैडम ने यहां तक कह दिया कि बाबू को तत्काल सामान्य प्रशासन विभाग में वापस भेज दिया जाए। लेकिन मैडम का स्टाफ भी पुराना खिलाड़ी निकला। उसे मालूम था कि गुस्से में निकले आदेशों पर तुरंत अमल करना समझदारी नहीं होगी। हुआ भी वही। कुछ देर बाद मैडम का गुस्सा शांत हुआ तो बाबू को फिर बुलाया गया। इस बार सुर बदले हुए थे। मैडम ने समझाइश दी—“ध्यान से काम किया करो, आगे से कोई गड़बड़ नहीं होनी चाहिए।” बस, बाबू की वापसी का फरमान वहीं ठंडे बस्ते में चला गया और मामला फिर पहले जैसा हो गया

2 प्रदेश के “अजीत डोभाल” बनेंगे सीनियर आईपीएस अफसर!
सरकारी गलियारों में इन दिनों एक सीनियर आईपीएस अफसर को लेकर नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। साहब जल्द ही रिटायर होने वाले हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद आराम करने का उनका कोई इरादा नजर नहीं आ रहा। बल्कि खबर यह है कि रिटायरमेंट के बाद साहब की ताकत कम होने के बजाय और बढ़ सकती है। बताया जा रहा है कि सरकार साहब को प्रदेश का मुख्य सुरक्षा सलाहकार बनाने की तैयारी में है। यानी केंद्र में जिस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अहम भूमिका है, कुछ उसी तर्ज पर प्रदेश में साहब को जिम्मेदारी देने की तैयारी है। माना जा रहा है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों के साथ-साथ दिल्ली में प्रदेश सरकार के महत्वपूर्ण संपर्कों और समन्वय में भी साहब की भूमिका अहम होगी। सरकार ने साहब की फाइल तैयार करने के निर्देश भी दे दिए हैं। अब फाइल कैबिनेट तक पहुंचने का इंतजार है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही साहब की नई भूमिका को लेकर आदेश जारी हो सकते हैं। करीब साढ़े छह साल पहले कांग्रेस सरकार के समय भी इसी तरह की व्यवस्था बनाने का मामला सामने आया था। लेकिन सरकार बदलने के साथ ही प्रस्ताव भी फाइलों में कहीं गुम हो गया। अब एक बार फिर उसी तरह की कुर्सी को लेकर हलचल है। खास बात यह कि आने वाले समय में प्रदेश के अगले डीजीपी के चयन में भी साहब की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यानी रिटायरमेंट के बाद भी साहब की ‘सरकारी पारी’ खत्म नहीं, बल्कि शायद असली पारी शुरू होने वाली है! 

3 कलेक्टर साहब आसानी से नहीं करते किसी पर भरोसा!
सरकारी गलियारों में एक जिले के कलेक्टर साहब इन दिनों अपने अलग ही अंदाज के लिए जाने जा रहे हैं। सीधी भर्ती वाले साहब किसी की बात पर फौरन भरोसा करने वालों में से नहीं हैं। कोई मामला सामने आए तो पहले उसकी बारीकी से पड़ताल होगी, फिर कागज देखे जाएंगे और उसके बाद ही साहब किसी नतीजे पर पहुंचेंगे। साहब का जांच-परख वाला अंदाज इतना पक्का है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से आने वाले निर्देश भी उनकी ‘वेरिफिकेशन प्रक्रिया’ से गुजरते बताए जाते हैं। बताया जाता है कि सीएमओ का कोई अफसर साहब को फोन कर किसी काम के निर्देश दे दे तो साहब तुरंत आदेश मानने के बजाय पहले उसकी पुष्टि कराने में जुट जाते हैं। मजेदार बात तो यह है कि साहब एक ही निर्देश की तस्दीक सीएमओ में पदस्थ दूसरे अफसरों से भी कर लेते हैं। जब तक दो-चार जगह से बात पक्की न हो जाए, फाइल आगे बढ़ाना साहब को पसंद नहीं। साहब की यही सावधानी अब उनके अधीनस्थों के लिए परेशानी का सबब बनती बताई जा रही है। नीचे से लेकर ऊपर तक अफसरों को लगता है कि साहब के यहां काम करवाने से पहले सिर्फ फाइल नहीं, बल्कि ‘विश्वास की परीक्षा’ भी पास करनी पड़ती है।

4 मलाईदार पोस्टिंग पाने में कामयाब हुए सीनियर आईपीएस
सरकारी गलियारों में एक सीनियर आईपीएस साहब इन दिनों काफी खुश नजर आ रहे हैं। लंबे समय से जिस ‘मलाईदार’ कुर्सी पर नजर थी, आखिरकार वह मिल ही गई। साहब की इस कामयाबी के पीछे उनकी लंबी मेहनत भी बताई जा रही है—हालांकि मेहनत का तरीका थोड़ा अलग था। बताया जाता है कि साहब सरकार को घेरने और अपनी सक्रियता दिखाने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते थे। मौका मिला नहीं कि चेहरा चमकाने की कोशिश शुरू। खास बात यह कि साहब अपनी बिरादरी के संगठन के मुखिया भी हैं। लेकिन संगठन की कुर्सी संभालने के बावजूद संगठन के लोगों के हितों को लेकर उनकी सक्रियता कितनी रही, यह अलग सवाल है। गलियारों में तो यहां तक कहा जा रहा है कि साहब ने संगठन के सदस्यों की परेशानियों और मांगों को लेकर उतनी आवाज नहीं उठाई, जितनी ऊर्जा अपनी पोस्टिंग के लिए लगाई। आखिरकार साहब की कोशिशें रंग लाई और सरकार ने उन्हें मनपसंद विभाग की जिम्मेदारी दे दी। अब साहब के समर्थक इसे बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं तो विरोधी इसे ‘अपना काम बनता, भाड़ में जाए संगठन’ वाले अंदाज में देख रहे हैं। खैर, पोस्टिंग तो मिल गई है, लेकिन असली कहानी अब शुरू होगी। क्योंकि सरकारी गलियारों में कानाफूसी है कि नई कुर्सी पर बैठते ही साहब का ‘खेल’ शुरू होगा। अब इस खेल में क्या-क्या रंग देखने को मिलते हैं और उसकी खबरें कब बाहर आती हैं, इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।

5 यह अफसर तो बहुत दिलेर है, मुख्यमंत्री से भी नहीं डरता!
सरकारी गलियारों में राज्य प्रशासनिक सेवा के एक साहब इन दिनों अपने ‘दबंग’ अंदाज के लिए चर्चा में हैं। साहब का बैच आईएएस अवॉर्ड की कतार में काफी आगे निकल चुका है। बैचमेट्स में कई अफसर आईएएस बन भी गए, लेकिन साहब का मामला फिलहाल एक जांच की वजह से अटका बताया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि आईएएस का लिफाफा बंद होने के बावजूद साहब के तेवरों में कोई कमी नहीं आई है। पिछले दिनों तो साहब ने ऐसा कारनामा कर दिया कि मातहत भी हैरान रह गए। बताया जाता है कि जिस विभाग में साहब पदस्थ हैं, वहीं के एक कर्मचारी के खिलाफ चल रही जांच खत्म कर उसे बहाल करने का संदेश सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से आया था। लेकिन साहब ने कथित तौर पर आदेश पर अमल करने से पहले कर्मचारी से ही अपनी ‘मांग’ रख दी। गलियारों में तो यह भी कहा जा रहा है कि मांग पूरी न होने पर जांच और लंबी खींचने की चेतावनी तक दे दी गई। कर्मचारी भी शायद साहब के मिजाज से अच्छी तरह वाकिफ था। उसने सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी बात पहुंचा दी। मामला ऊपर तक पहुंचा तो साहब को आखिरकार कर्मचारी को बहाल करना पड़ा।

6 आईएएस मैडम तबादला कराएंगी निरस्त!
सरकारी विभागों में अफसरों की कमी कोई नई बात नहीं, लेकिन एक विभाग में इन दिनों उप सचिव स्तर के अधिकारियों का ऐसा टोटा पड़ा है कि कुर्सियां अफसरों का इंतजार कर रही हैं। जैसे-तैसे एक प्रमोटी आईएएस मैडम को विभाग में पदस्थ किया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों में मैडम ने यहां से बिदा ले ली। अब सरकार ने एक और प्रमोटी आईएएस मैडम को उनकी जगह भेजा है। आदेश भी काफी पहले निकल चुका है, लेकिन मैडम हैं कि विभाग में आमद देने का नाम ही नहीं ले रही हैं। शांत और सरल स्वभाव की बताई जाने वाली मैडम शायद विभाग का माहौल देखकर ही दूरी बनाए हुए हैं। गलियारों में तो अब यह भी कानाफूसी है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो मैडम पदभार संभालने के बजाय अपना तबादला आदेश ही निरस्त कराने की कोशिश कर सकती हैं। यानी सरकार ने भेजा विभाग में और मैडम पहुंचने से पहले ही वापसी का रास्ता तलाशने लगें! उधर विभाग के एडिशनल सेक्रेट्री साहब भी ज्यादातर समय छुट्टी पर रहने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में विभाग की गाड़ी आखिर खींचे कौन? नतीजा यह है कि एक सीनियर अफसर को ही लगातार विभाग की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि विभाग में खाली पड़ी कुर्सियों पर अफसर बैठते हैं या फिर कुर्सियां ही अफसरों का इंतजार करती रह जाती हैं!

7 मंत्री और पीएस में खत्म ही नहीं हो रहा विवाद!
सरकारी गलियारों में इन दिनों एक मलाईदार विभाग की कहानी खूब दिलचस्प होती जा रही है। विभाग के कद्दावर मंत्री और प्रमुख सचिव साहब के बीच तालमेल की गाड़ी पटरी पर आने का नाम ही नहीं ले रही। वैसे तो सत्ता के गलियारों में मंत्री और अफसर के बीच मतभेद कोई नई बात नहीं, लेकिन यहां मामला कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ता बताया जा रहा है। बताया जाता है कि मंत्री और पीएस के बीच बातचीत अब बेहद सीमित रह गई है। ऊपर से फाइलों की ऐसी ‘नोकझोंक’ चल रही है कि एक तरफ से फाइल जाती है तो दूसरी तरफ से उस पर आपत्तियों की लंबी सूची लौट आती है। नतीजा यह कि काम आगे बढ़ने के बजाय फाइलें एक-दूसरे की टेबल के चक्कर काटती रहती हैं। विभाग में बैठे अफसर और कर्मचारी भी इस खींचतान से परेशान बताए जा रहे हैं। सबकी नजर अब इसी बात पर है कि पहले क्या होता है—पीएस साहब का तबादला या मंत्री और अफसर के बीच सुलह?  गलियारों में तो अब यही कहा जा रहा है कि दोनों में दोस्ती हो जाए तो विभाग की रफ्तार लौट सकती है। वरना जिस तरह फाइलों की ‘आपत्ति यात्रा’ चल रही है, उसमें काम से ज्यादा कागज ही आगे-पीछे होते रहेंगे। फिलहाल मंत्रीजी और पीएस साहब के बीच ‘कोल्ड वॉर’ कब खत्म होता है, इस पर पूरे विभाग की नजर टिकी हुई है।

8 एक अफसर के कारण आईएएस की डीपीसी पर फिर मंडरा रहा संकट!
प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को आईएएस अवॉर्ड देने की तैयारी चल रही है, लेकिन डीपीसी की राह में एक अफसर बार-बार रोड़ा बनता नजर आ रहा है। फाइल आगे बढ़ती है तो मामला अदालत पहुंच जाता है और अधिकारी पीछे हटते हैं तो फिर कोई नया मोड़ सामने आ जाता है। बताया जाता है कि संबंधित अफसर के भर्ती वर्ष में बीच में बदलाव कर उन्हें वरिष्ठता में ऊपर कर दिया गया था। इससे प्रभावित कुछ अफसरों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और आदेश के बाद संबंधित अफसर की वरिष्ठता फिर पहले वाली स्थिति में आ गई। मामला यहीं खत्म होता, उससे पहले ही संबंधित अफसर भी कोर्ट पहुंच गए और वहां से स्टे मिलने की बात सामने आई। अब विभाग ने तमाम उलझनों के बीच डीपीसी की फाइल तैयार कर यूपीएससी भेज दी है। लेकिन जानकारों की मानें तो असली परीक्षा अभी बाकी है। वजह यह है कि वरिष्ठता सूची में विवादित अफसर की स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। गलियारों में कानाफूसी है कि सीनियर अफसरों के बीच जूनियर माने जा रहे अफसर का नाम शामिल होने पर यूपीएससी की ओर से आपत्ति उठ सकती है। अगर ऐसा हुआ तो डीपीसी की प्रक्रिया एक बार फिर अटक सकती है। यानी आईएएस बनने का इंतजार कर रहे अफसरों के लिए एक बार फिर सवाल यही है—डीपीसी होगी या फिर एक अफसर की ‘वरिष्ठता की कहानी’ पूरी प्रक्रिया को दोबारा अदालत और फाइलों के चक्कर में डाल देगी?

9 डिप्टी सेक्रेट्री मैडम की रिलीविंग एक साल बाद भी नहीं हुई!
सरकारी विभागों में तबादले के आदेश निकलना कोई बड़ी बात नहीं, असली कहानी तो तब शुरू होती है जब अफसर रिलीव ही न हों। राज्य प्रशासनिक सेवा की एक डिप्टी सेक्रेट्री मैडम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। मैडम का तबादला हुए करीब एक साल बीत चुका है, लेकिन पुरानी कुर्सी से उनका मोह अब तक खत्म नहीं हुआ है। नियम-कायदे के हिसाब से तबादले के बाद मैडम को करीब एक सप्ताह में रिलीव होकर दस दिनों के भीतर नई पदस्थापना वाली जगह पर आमद दे देनी चाहिए थी। लेकिन समय गुजरता गया और मैडम वहीं की वहीं रहीं। नई जगह इंतजार करती रही और पुराना विभाग मैडम की सेवाओं का लाभ उठाता रहा। मजेदार बात यह है कि मैडम जिस संस्थान में फिलहाल पदस्थ हैं, वह भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करने वाली एजेंसी है। ऐसे में गलियारों में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मैडम को इस संस्थान से इतना लगाव क्यों है कि तबादले के एक साल बाद भी रिलीविंग की नौबत नहीं आई? अब विभाग में कानाफूसी है कि मैडम की रवानगी कब होगी या फिर कोई नया आदेश आकर पुराने आदेश को ही किनारे कर देगा। फिलहाल नई पदस्थापना वाली कुर्सी मैडम का इंतजार कर रही है और मैडम पुरानी कुर्सी छोड़ने के मूड में नजर नहीं आ रहीं!

10 वन विभाग का अपना ही राज, सीनियर को हटाकर जूनियर को कमान!
वन विभाग के बारे में कहा जाता है कि यहां के नियम-कायदे बाकी विभागों से कुछ अलग ही नजर आते हैं। कौन सा अफसर किस पर मेहरबान है और किससे नाराज, यह तो पता नहीं चलता, लेकिन आदेश निकलते ही पूरे महकमे में उसकी वजह तलाशने का सिलसिला जरूर शुरू हो जाता है। पिछले दिनों महाकौशल इलाके से निकला एक ऐसा ही आदेश वन महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जाता है कि सीसीएफ स्तर की एक महिला अफसर के खिलाफ विभाग को कुछ अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतें मिली थीं। शिकायत सामने आते ही विभाग ने मैडम से उनका प्रभार वापस ले लिया। अब असली कहानी यहीं से शुरू होती है। मैडम का चार्ज किसी समकक्ष या उनसे वरिष्ठ अफसर को देने के बजाय उनसे करीब दो पद नीचे के डीएफओ स्तर के एक अफसर को सौंप दिया गया। जबकि विभाग में कई वरिष्ठ अफसर मौजूद बताए जा रहे हैं। बस, फिर क्या था—महकमे में सवालों की फुसफुसाहट शुरू हो गई। आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि वरिष्ठ अफसरों को दरकिनार कर जूनियर अफसर को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई? वन विभाग में आदेश भले ही चुपचाप निकल गया हो, लेकिन उसके मायने तलाशने का काम अब पूरे महकमे में जोर-शोर से चल रहा है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—सीनियर अफसर मौजूद थे, फिर जूनियर को ही क्यों मिली जंगल की कमान?

Abhishek Dubey

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Managing Editor

A journalist with more than 15 years of experience in investigative reporting

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