आईएएस मैडम को प्लॉट के पैसे वापस चाहिए : संकट में आ गई हैं आईपीएस मैडम : विधायकों ने सीएम से की कलेक्टर की शिकायत
मध्यप्रदेश की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था इन दिनों कई अंदरूनी विवादों और चर्चाओं को लेकर सुर्खियों में है। कहीं IAS अफसरों की जमीन डील अटक गई है तो कहीं IPS अफसर का EWS सर्टिफिकेट विवाद दिल्ली तक पहुंच गया है। वहीं कलेक्टरों की कार्यशैली, टेंडर कैंसिलेशन और पुलिस विभाग के ऑडियो बम ने सत्ता और प्रशासनिक गलियारों का माहौल गर्म कर दिया है।

1 आईएएस मैडम को प्लॉट के पैसे वापस चाहिए
राजधानी में डेप्युटेशन पर तैनात एक आईएएस मैडम इन दिनों अपनी ही बिरादरी के अफसरों से खासा नाराज बताई जा रही हैं। वजह बनी है अफसरों की एक हाई-प्रोफाइल जमीन डील। चर्चा है कि करीब पचास अफसरों ने मिलकर जमीन खरीदी थी और बाकायदा उसके प्लॉट भी काट लिए गए। सपना था आलीशान कॉलोनी बसाने का, लेकिन अब पूरा मामला फाइलों और अनुमतियों के फेर में फंस गया है। कॉलोनी का विकास आगे नहीं बढ़ पा रहा और सारी मंजूरियां पेंडिंग पड़ी हैं। बताया जाता है कि इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए अफसरों ने सोशल मीडिया पर अलग ग्रुप भी बना रखा है। इसी ग्रुप में मैडम आए दिन अपनी भड़ास निकाल रही हैं। हाल ही में उन्होंने साफ शब्दों में लिख दिया कि राजधानी में बैठे अफसर भी इस प्रोजेक्ट पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं, इसलिए अब उन्हें अपना लगाया हुआ पैसा ब्याज सहित वापस चाहिए। मैडम के लगातार तीखे संदेशों से बाकी अफसर भी परेशान बताए जा रहे हैं। अब अंदरखाने चर्चा यह है कि किसी तरह उनका हिसाब-किताब कर उन्हें इस समूह से अलग कर दिया जाए, ताकि ग्रुप में रोज-रोज का “प्रशासनिक तनाव” खत्म हो सके।
2 संकट में आ गई हैं आईपीएस मैडम
हाल ही में चयनित एक युवा आईपीएस मैडम इन दिनों मुश्किलों में घिरती नजर आ रही हैं। प्रदेश की रहने वाली इस अफसर को केरलम कैडर अलॉट हुआ था और चयन के बाद से ही उनकी सफलता की खूब चर्चा हो रही थी। लेकिन अब मामला सीधे दिल्ली तक पहुंच गया है। चर्चा है कि मैडम ने ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के आधार पर परीक्षा में सफलता हासिल की थी। इसी बीच किसी “जानकार” ने शिकायत कर दी कि मैडम वास्तव में ईडब्ल्यूएस श्रेणी की पात्रता में आती ही नहीं हैं। शिकायत मिलते ही दिल्ली स्तर पर हलचल बढ़ी और जांच के लिए पत्र मंत्रालय पहुंच गया। मंत्रालय ने भी बिना देर किए मैडम के गृह जिले से पूरी रिपोर्ट तलब कर ली। बताया जाता है कि कलेक्टर स्तर पर हुई जांच में शिकायत सही पाई गई। रिपोर्ट में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि आईपीएस मैडम ईडब्ल्यूएस श्रेणी की पात्र नहीं हैं। अब कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने भी अपना प्रतिवेदन दिल्ली भेज दिया है। अफसरों के गलियारों में चर्चा यही है कि अब सबकी नजर दिल्ली से होने वाली अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। वहीं, बैचमेट्स के बीच यह मामला इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रहा है।
3 विधायकों ने सीएम से की कलेक्टर की शिकायत
एक बड़े जिले के सत्ताधारी दल के विधायक भले ही आपस में एक-दूसरे को ज्यादा पसंद न करते हों, लेकिन इन दिनों एक मुद्दे ने सबको “एक मंच” पर ला दिया है। और वह मुद्दा है—अपने जिले के कलेक्टर साहब। अफसरशाही के गलियारों में चर्चा है कि जिले के तमाम विधायक कलेक्टर से इतने परेशान हो चुके हैं कि अब उन्होंने मतभेद भुलाकर मोर्चा खोल दिया है। मामला सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है। बताया जाता है कि विधायकों ने सामूहिक रूप से सीएम से मुलाकात कर कलेक्टर साहब की लंबी-चौड़ी शिकायतों की फाइल खोल दी। विधायकों का दर्द भी कम दिलचस्प नहीं है। उनका कहना है कि कलेक्टर साहब बैठक तो बुलाते हैं, लेकिन तय समय से पहले ही शुरू कर देते हैं। अब जनप्रतिनिधि समय पर पहुंचें या “सरकारी घड़ी” से अपनी घड़ी मिलाएं, यही समझ नहीं पा रहे। मोबाइल का हाल भी बड़ा रहस्यमयी बताया जा रहा है—कभी तुरंत रिसीव, तो कभी घंटों तक सन्नाटा। इतना ही नहीं, विधायकों का आरोप है कि उनके प्रोटोकॉल का भी पूरा ध्यान नहीं रखा जा रहा। जनता काम लेकर उनके पास आती है, लेकिन कलेक्टर साहब की कार्यशैली के चलते वे खुद को “बेबस जनप्रतिनिधि” महसूस कर रहे हैं।
4 निर्वाचन आयोग में समन्वयक के लिए तीन आईपीएस का पैनल
पुलिस महकमे में इन दिनों एक खास कुर्सी पर कौन काबिज होगा इसे लेकर बहुत चर्चा है। यह कुर्सी भारत निर्वाचन आयोग और पुलिस मुख्यालय के बीच “सीधा कनेक्शन” मानी जाती है। इस जिम्मेदारी को संभाल रहे एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर हाल ही में रिटायर हो गए और उनके विदा होते ही अब सवाल शुरू हो गया है—“आखिर अगला भरोसेमंद चेहरा कौन होगा? सूत्र बताते हैं कि इस जिम्मेदारी के लिए तीन आईपीएस अफसरों के नामों का पैनल तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया गया है। अब फाइल सत्ता के गलियारों में धीरे-धीरे घूम रही है और पुलिस मुख्यालय से लेकर मंत्रालय तक हर कोई अपने-अपने हिसाब से गणित बैठाने में जुटा है।
5 आईएएस मैडम के टेंडर दूसरे आईएएस ने आते ही किए कैंसिल
सचिव स्तर की एक आईएएस मैडम इन दिनों अफसरशाही के गलियारों में खूब चर्चा बटोर रही हैं। कहा जा रहा है कि मैडम को अपने तबादले की भनक पहले ही लग गई थी। बस फिर क्या था—जाने से पहले उन्होंने ऐसी “स्पीड” दिखाई कि विभाग में करोड़ों रुपये के टेंडर आनन-फानन में जारी हो गए। इतना ही नहीं, अंदरखाने खबर है कि कुछ वेंडरों से एडवांस स्तर की “सेटिंग” भी हो चुकी थी। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। जिन आशंकाओं से मैडम घिरी थीं, वही सच साबित हुईं और उनका तबादला सीधे लूप लाइन में कर दिया गया। मजे की बात यह रही कि लंबे समय से लूप लाइन में बैठे एक साहब को मैडम की कुर्सी मिल गई। नई कुर्सी संभालते ही साहब ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। बताते हैं कि फाइलें खुलीं, समीक्षा हुई और फिर एक-एक करके कई टेंडर निरस्त होने लगे। विभाग में यह खबर फैली तो वेंडरों के चेहरे का रंग उड़ गया। अब बेचारे वेंडर सीधे मैडम के दरबार में पहुंच गए। किसी ने हाथ जोड़े, किसी ने पुराने “कमिटमेंट” याद दिलाए। गुहार यही थी—या तो टेंडर बहाल करवा दीजिए, या फिर जो अग्रिम राशि गई है, वह वापस दिलवा दीजिए। लेकिन सूत्र बताते हैं कि मैडम फिलहाल दोनों ही मामलों में “मौन साधना” की मुद्रा में हैं।
6 आईपीएस अफसरों पर भारी पड़ रहा कांस्टेबल
एक कांस्टेबल इन दिनों पुलिस महकमे में किसी फिल्मी किरदार से कम चर्चा में नहीं है। हालात ऐसे बन गए हैं कि उसकी कहानी कई आईपीएस अफसरों पर भी भारी पड़ती नजर आ रही है। कहानी की शुरुआत ट्रांसफर विवाद से हुई। बताया जाता है कि कांस्टेबल की अपने टीआई साहब से जमकर ठन गई थी। मामला इतना बढ़ा कि गुस्से में कांस्टेबल ने टीआई से लेकर तत्कालीन एसपी तक को धमकी भरे मैसेज भेज डाले। पुलिस महकमे में हड़कंप मचना तय था। तत्कालीन एसपी ने तुरंत एक्शन लेते हुए कांस्टेबल को निलंबित कर जांच बैठा दी। जांच पूरी हुई तो मौजूदा एसपी ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कांस्टेबल की बर्खास्तगी पर मुहर लगा दी। सबको लगा कि अब कहानी खत्म। लेकिन असली ट्विस्ट तो इसके बाद आया। कांस्टेबल सीधे हाईकोर्ट पहुंच गया और वहां से ऐसी “राहत” लेकर लौटा कि पूरे महकमे में चर्चा छिड़ गई। कोर्ट से बहाली मिलते ही जनाब ने सोशल मीडिया पर एंट्री मारी और एक लाइन लिख दी—“टाइगर भी जिंदा है…” बस फिर क्या था, यह पोस्ट देखते ही पुलिस लाइन से लेकर अफसरों के व्हाट्सऐप ग्रुप तक में हलचल मच गई। अब चर्चा यही है कि कांस्टेबल की यह “फिल्मी वापसी” आगे और कौन-कौन से सीन दिखाने वाली है। वहीं कुछ लोग मजे लेकर कह रहे हैं—“साहब लोग बदलते रहे, लेकिन टाइगर आखिर टाइगर ही निकला!”
7 प्रमोटी आईएएस ने सरकार की पूरे प्रदेश में कराई किरकिरी
एक प्रमोटी आईएएस साहब ने इन दिनों सरकार की ऐसी किरकिरी करा दी कि मंत्रालय के गलियारों में लोग फाइल कम और तारीख ज्यादा पढ़ते नजर आए। मामला सरकार की नई तबादला नीति से जुड़ा है, जिसे बड़े ठाठ से जारी किया गया था। बताया जाता है कि इस नीति को अंतिम रूप देकर जारी करने की जिम्मेदारी सचिव स्तर के एक प्रमोटी आईएएस साहब के पास थी। साहब ने भी पूरी गंभीरता से आदेश जारी कर दिए, लेकिन जल्दबाजी में ऐसा “ऐतिहासिक” खेल हो गया कि पूरे मंत्रालय में मुस्कान फैल गई। दरअसल, आदेश में तबादलों की अंतिम तारीख जून 2026 लिखी जानी थी, लेकिन साहब की मेहरबानी से वह सीधे जून 2016 पहुंच गई। यानी सरकार मानो दस साल पीछे लौट गई। जिसने भी आदेश पढ़ा, वह पहले चौंका और फिर हंसे बिना नहीं रह सका। जैसे ही मामला पकड़ में आया, आनन-फानन में संबंधित विभाग को सूचना भेजी गई। फिर पुराने आदेश को सुधारते हुए नया संशोधित आदेश जारी करना पड़ा। अब मंत्रालय में चर्चा यह है कि यह पूरा कमाल “कॉपी-पेस्ट प्रशासन” का नतीजा है। लोग चुटकी ले रहे हैं कि साहब ने शायद पुरानी फाइल खोली और तारीख बदलना भूल गए।
8 एसपी मैडम के नाम पर टीआई कर रहे वसूली
इन दिनों एक तेज-तर्रार एसपी मैडम के जिले में पुलिसिया गलियारों से लेकर रेत कारोबारियों तक एक ही चर्चा गर्म है—“मैडम सख्त हैं, लेकिन उनके नाम पर खेल और भी सख्त चल रहा है!” सूत्रों की मानें तो जिले के कुछ टीआई स्तर के अफसर इन दिनों रेत से भरे डंपरों को अपना चलता-फिरता एटीएम समझ बैठे हैं। रात ढलते ही हाईवे पर “चेकिंग अभियान” शुरू होता है और फिर डंपरों की रफ्तार से ज्यादा तेजी से नोटों का हिसाब-किताब होने लगता है। मजेदार बात ये बताई जा रही है कि पूरी वसूली “एसपी मैडम का नाम” लेकर की जा रही थी, जबकि मैडम को इसकी हवा तक नहीं थी। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब हाल ही में एक महिला टीआई ने अपनी टीम के साथ चेकिंग के नाम पर एक व्यापारी को ऐसा घेरा कि मामला सीधे शिकायत तक पहुंच गया। व्यापारी भी निकला पक्का खिलाड़ी… उसने पूरी कहानी सीधे एसपी मैडम तक पहुंचा दी। फिर क्या था! मैडम ने मामले को हल्के में लेने के बजाय ऐसा एक्शन लिया कि पूरे विभाग में खलबली मच गई। चर्चा है कि मैडम ने पहले तो महिला टीआई को तत्काल सस्पेंड किया और फिर मामला यहीं नहीं रुका—एफआईआर तक दर्ज करा दी गई। अब पुलिस महकमे में यह किस्सा चाय की चुस्कियों के साथ बड़े चटखारे लेकर सुनाया जा रहा है।
9 आईएएस का दावा प्रदेश में कहीं पानी का संकट नहीं
प्रदेश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है—सूरज जैसे रोज़ रिकॉर्ड तोड़ने की ठानकर निकला हो और दोपहर में सड़कें मानो तपते तवे में बदल जा रही हों। ऐसे में पानी की समस्या हर जिले की सबसे बड़ी “रोजमर्रा की खबर” बनी हुई है। कहीं टंकी सूखी है तो कहीं हैंडपंप जवाब दे चुके हैं, और टैंकरों के पीछे लाइनें लंबी होती जा रही हैं। लेकिन इसी बीच प्रशासनिक गलियारों में एक बयान ने हलचल बढ़ा दी है। पानी देने वाले विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे एक वरिष्ठ आईएएस अफसर ने मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में बेहद आत्मविश्वास के साथ कह दिया—“जिले में कहीं भी पानी का संकट नहीं है।” अब अफसर का यह बयान सुनकर कमरे में भले ही औपचारिकता में सिर हिल गए हों, लेकिन बाहर निकलते ही चर्चा शुरू हो गई—“साहब ने यह किस जिले की बात कर दी?” सूत्र बताते हैं कि साहब अपने शांत और बेहद रिज़र्व स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। बातचीत कम, मुलाकात और भी कम—और ग्राउंड विज़िट तो जैसे उनकी डायरी से बाहर की चीज़ हो। फाइलों और रिपोर्ट्स के आधार पर काम करने की उनकी शैली ने उन्हें एक सटीक, लेकिन ‘डेस्क-आधारित’ अफसर की छवि दे रखी है। यही वजह है कि जब शहरों और गांवों में लोग पानी के लिए सुबह से लाइन में लगे हों, तब “नो वॉटर क्राइसिस” वाला बयान लोगों को थोड़ा चौंका गया है।
10 गरमी, खदानें और आईपीएस साहब का ‘ऑडियो बम’!
प्रदेश में इन दिनों तापमान सिर्फ मौसम की वजह से ही नहीं बढ़ रहा, बल्कि एक सीनियर आईपीएस अफसर के “ऑडियो ज्ञान” ने भी प्रशासनिक गलियारों का पारा हाई कर दिया है। साहब ने हाल ही में एक ऑडियो जारी कर पड़ोसी राज्य में चल रहे कथित उत्खनन पर ऐसा बयान दिया कि सुनने वाले भी चौंक गए। उनका दावा है कि वहां “जमकर खनन” हो रहा है और यही वजह है कि उस इलाके का तापमान देश में सबसे ऊपर पहुंच गया है। दिलचस्प बात यह है कि साहब का इस मामले से “इमोशनल कनेक्शन” भी बताया जा रहा है। उन्होंने खुद कहा कि वे उसी जिले से ताल्लुक रखते हैं, जो इस समय देश के सबसे गर्म जिलों में गिना जा रहा है। यानी बयान सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि “मिट्टी से जुड़ी पीड़ा” वाला भी माना जा रहा है। ऑडियो में साहब ने पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री को सलाह भी दे डाली—और वह भी सीधे-सीधे। उनका कहना है कि अगर सच में तापमान कम करना है, तो खदानों पर कम से कम दस साल के लिए प्रतिबंध लगाना पड़ेगा।





