केन्द्रीय मंत्री की शिकायत या साजिश से हटी आईएएस मैडम : प्रमोटी आईपीएस के कारण देशभर में हुई पुलिस की किरकिरी : रिटायर्ड आईएएस से निपटने के लिए एसीएस की पोस्टिंग
मप्र नौकरशाही में हलचल: IAS मैडम की बिदाई, IPS विवाद और तबादलों की अंदरूनी कहानी
MP IAS-IPS News: केंद्रीय मंत्री की शिकायत से तबादला, कलेक्टर अमेरिका रवाना, कमिश्नर हटे
मध्यप्रदेश ब्यूरोक्रेसी अपडेट: IAS-IPS अफसरों के तबादले, विवाद और राजनीतिक समीकरण
MP Bureaucracy Insider: IAS मैडम हटीं, प्रमोटी IPS से पुलिस की किरकिरी, मंत्री-PS में टकराव

1 केन्द्रीय मंत्री की शिकायत या साजिश से हटी आईएएस मैडम
हाल ही में जारी तबादला सूची में एक आईएएस अधिकारी को उनके पद से हटाकर ऐसे विभाग में भेज दिया गया, जिसे आमतौर पर प्रशासनिक गलियारों में "लूप लाइन" माना जाता है। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा के दौरान एक केन्द्रीय मंत्री ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने की शिकायत की थी। इसी शिकायत के बाद उनके तबादले का फैसला लिया गया। हालांकि, सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में एक दूसरी कहानी भी चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार, उक्त आईएएस अधिकारी एक जबकि केन्द्रीय मंत्री उस रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी के करीबी रहे हैं और वे नहीं चाहते थे कि जांच आगे बढ़े। इसी वजह से प्रोटोकॉल उल्लंघन का मुद्दा उठाकर मुख्यमंत्री पर अधिकारी को हटाने का दबाव बनाया गया। इस तरह से शिकायत और साजिश से मैडम की बिदाई कराई गई है। मैडम सीधी भर्ती की आईएएस हैं, जबकि उनकी जगह एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
2 प्रमोटी आईपीएस के कारण देशभर में हुई पुलिस की किरकिरी
एक प्रमोटी आईपीएस अधिकारी की वजह से प्रदेश पुलिस की देशभर में किरकिरी हो रही है। मामला उस समय का है, जब वे एक छोटे जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात थे। चर्चा है कि अपने कार्यकाल की छवि चमकाने के लिए उन्होंने पड़ोसी राज्य के एक व्यक्ति को उठवाकर उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत फर्जी मामला दर्ज करा दिया था। बताया जाता है कि पीड़ित व्यक्ति की शिकायत के बाद पड़ोसी राज्य की पुलिस ने पूरे प्रकरण की जांच की। जांच में एनडीपीएस की कार्रवाई संदिग्ध और फर्जी पाई गई। इसके आधार पर पड़ोसी राज्य की अदालत ने कार्रवाई में शामिल सौ से अधिक पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। अदालती आदेश के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और देशभर में उसकी छवि प्रभावित हुई है। दिलचस्प बात यह है कि उस समय जिले की कमान संभालने वाले एसपी साहब फिलहाल एक बटालियन में कमांडेंट के पद पर तैनात हैं।
3 रिटायर्ड आईएएस से निपटने के लिए एसीएस की पोस्टिंग
एक सरकारी संस्था के अध्यक्ष पद पर काबिज एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी इन दिनों सरकार के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं। कभी उनकी अपने विभाग के एसीएस से ठन जाती है तो कभी वे सरकार के फैसलों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। उनकी सक्रियता और आक्रामक रवैये ने सरकार की परेशानी बढ़ा रखी है। सरकार काफी समय से ऐसे वरिष्ठ अधिकारी की तलाश में थी, जो इस रिटायर्ड आईएएस के सामने मजबूती से खड़ा हो सके। अब यह तलाश पूरी होती दिखाई दे रही है। हाल ही में सरकार ने लूप लाइन में पदस्थ एक तेज-तर्रार और लड़ाकू छवि वाले एसीएस को उसी विभाग की जिम्मेदारी सौंप दी है, जिसके अधीन यह संस्था आती है। अब दोनों दिग्गज अधिकारियों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है। दिलचस्प यह है कि जिस तरह रिटायर्ड आईएएस अपने तेवरों के लिए जाने जाते हैं, उसी तरह नए एसीएस भी टकराव से पीछे हटने वालों में नहीं गिने जाते। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुकाबला नौकरशाही का सबसे दिलचस्प घटनाक्रम बन सकता है।
4 केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने का आईपीएस का रास्ता साफ
एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी का केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। हाल ही में केन्द्र सरकार ने उन्हें डीजी स्तर के लिए इम्पैनल कर लिया है। इसके साथ ही दिल्ली में उनकी तैनाती की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि केन्द्र में पदस्थापना होने पर उन्हें किसी महत्वपूर्ण यूनिट या संगठन की कमान सौंपी जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, अधिकारी लंबे समय से डीजी रैंक पर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए इम्पैनल होने की कोशिश में लगे हुए थे। अब उनकी यह प्रतीक्षा पूरी होती नजर आ रही है। दिलचस्प बात यह है कि जिस संस्था में वे वर्तमान में पदस्थ हैं, वह हाल ही में एक स्टिंग ऑपरेशन के कारण चर्चा में रही थी। स्टिंग में कुछ अधिकारियों के बीच कथित तौर पर लेन-देन कर मामलों के निपटारे की बातचीत सामने आई थी, जिससे संस्था की छवि को झटका लगा था। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि इस घटनाक्रम से साहब भी खासे असहज और निराश बताए जा रहे थे। ऐसे में इम्पैनलमेंट की खबर को उनके लिए बड़ी राहत और नई जिम्मेदारी की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखा जा रहा है।
5 दो साल की स्टडी लीव पर जाएंगी कलेक्टर मैडम
सीधी भर्ती की एक तेज-तर्रार आईएएस अधिकारी, जो वर्तमान में प्रदेश के एक बड़े जिले में कलेक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं, जल्द ही अमेरिका रवाना होने वाली हैं। हालांकि यह दौरा किसी आधिकारिक कार्यक्रम या निजी पर्यटन के लिए नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा के लिए होगा। सूत्रों के अनुसार, मैडम की दो वर्ष की स्टडी लीव को सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसके बाद वे विदेश में उच्च अध्ययन करेंगी। प्रशासनिक हलकों में इस फैसले की चर्चा इसलिए भी है, क्योंकि आमतौर पर किसी बड़े जिले में कलेक्टर के पद पर तैनात अधिकारी का कार्यकाल बीच में छोड़कर पढ़ाई के लिए जाना कम ही देखने को मिलता है।
6 आखिरकार हो गई कमिश्नर साहब की बिदाई
एक बड़े संभाग में कमिश्नर के पद पर तैनात प्रमोटी आईएएस अधिकारी की आखिरकार फील्ड पोस्टिंग समाप्त हो गई है। सरकार ने उन्हें हटाकर मंत्रालय के एक ऐसे पद पर पदस्थ कर दिया है, जिसे प्रशासनिक हलकों में लूप लाइन माना जाता है। बताया जाता है कि अधिकारी के सेवानिवृत्त होने में अब ज्यादा समय शेष नहीं है। इसी बीच उनके कामकाज के तरीके को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। सूत्रों के अनुसार, वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों, विशेषकर तहसीलदारों को छोटी-छोटी बातों पर कारण बताओ नोटिस जारी कर रहे थे, जिससे अधीनस्थ अमले में असंतोष बढ़ रहा था। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी रही कि नोटिस मिलने के बाद जब संबंधित अधिकारी उनसे मिलने पहुंचते थे, तो उनसे अनुचित अपेक्षाएं की जाती थीं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऐसी शिकायतें लगातार सरकार तक पहुंच रही थीं। कहा जा रहा है कि जब शिकायतों का सिलसिला बढ़ गया और मामला सरकार के संज्ञान में गंभीरता से आया, तो अधिकारियों ने ज्यादा इंतजार नहीं किया। नतीजतन, कमिश्नर साहब को फील्ड से हटाकर मंत्रालय भेज दिया गया। नौकरशाही में इस कार्रवाई को लंबे समय से लंबित फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
7 उल्टा पड़ गया डॉक्टर साहब को प्रचार-प्रसार
इन दिनों कई जिलों के कलेक्टर जनता के बीच अपनी संवेदनशील छवि दिखाने के लिए विभिन्न गतिविधियों के वीडियो बनवाकर उन्हें अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा कर रहे हैं। इसी कड़ी में एक ऐसे कलेक्टर साहब, जो पेशे से डॉक्टर भी रहे हैं, ने हाल ही में एक वीडियो पोस्ट कराया। वीडियो में साहब जिले के सरकारी अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उस दौरान ऑपरेशन थिएटर में व्यस्त डॉक्टरों के कारण कुछ मरीज इंतजार कर रहे थे। ऐसे में कलेक्टर साहब ने स्टेथोस्कोप उठाया और प्रतीकात्मक रूप से मरीजों की जांच करते नजर आए। वीडियो का उद्देश्य उनकी संवेदनशीलता और चिकित्सकीय पृष्ठभूमि को प्रदर्शित करना था। लेकिन सोशल मीडिया की दुनिया में प्रचार हमेशा मनमुताबिक परिणाम नहीं देता। वीडियो तेजी से वायरल हुआ और उसे उन लोगों ने भी देख लिया, जो साहब के परवीक्षाधीन अधिकारी रहते हुए उनके पुराने जिले से जुड़े रहे हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर पुरानी चर्चाएं फिर ताजा होने लगीं। एक यूजर ने तो टिप्पणी करते हुए पुराने विवादों का जिक्र कर दिया और कोविड काल के दौरान राहत एवं सहायता राशि के संग्रहण को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद वीडियो के कमेंट सेक्शन में भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
8 तबादलों को लेकर भिड़े कद्दावर मंत्री और पीएस
तबादला सत्र के दौरान एक मलाईदार विभाग के कद्दावर मंत्री और विभाग के प्रमुख सचिव के बीच तबादलों को लेकर जबरदस्त खींचतान देखने को मिली। मामला इतना बढ़ गया कि विभाग की तबादला सूची तय समय सीमा के भीतर जारी ही नहीं हो सकी। सूत्रों के अनुसार, प्रमुख सचिव ने अपने स्तर पर तबादला सूची तैयार कर सरकार द्वारा निर्धारित डेडलाइन समाप्त होने से ठीक पहले अनुमोदन के लिए मंत्री जी के पास भेज दी। लेकिन सूची देखने के बाद मंत्री जी नाराज हो गए। बताया जाता है कि उनके पसंदीदा अधिकारियों के नाम सूची में शामिल नहीं थे, जिसके चलते उन्होंने तत्काल अनुमोदन देने से इनकार कर दिया। नतीजा यह हुआ कि विभाग की तबादला सूची अटक गई और सरकार द्वारा तय समय सीमा भी समाप्त हो गई। हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा तबादलों की समय सीमा में 24 घंटे की अतिरिक्त मोहलत दिए जाने से विभाग को राहत मिल गई। इसके बाद प्रमुख सचिव और मंत्री जी के बीच विस्तृत चर्चा हुई। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि बातचीत के दौरान मंत्री जी की पसंद के कुछ अधिकारियों के नाम सूची में जोड़े गए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और विभाग की तबादला सूची अंतिम समय में जारी हो सकी
9 दस महीने में हो ही गई मैडम की बिदाई
राज्य प्रशासनिक सेवा की एडीएम स्तर की एक अधिकारी को करीब दस महीने पहले प्रतिनियुक्ति पर एक बड़े विभाग में एडिशनल डायरेक्टर के पद पर भेजा गया था। लेकिन उनकी पदस्थापना शुरू से ही विभाग के भीतर विवाद और असंतोष का कारण बनी हुई थी। विभाग के अधिकारियों में भी उनकी प्रतिनियुक्ति को लेकर नाराजगी थी। दरअसल, जिस पद पर मैडम को भेजा गया था, उसे परंपरागत रूप से विभागीय अधिकारियों के प्रमोशन के माध्यम से भरा जाता रहा है। ऐसे में बाहरी प्रतिनियुक्ति को लेकर कई सवाल उठाए गए। विभाग की मंत्री ने कार्मिक विभाग की तत्कालीन सचिव को भी नोटशीट भेजकर पूछा था कि आखिर किस नियम और प्रक्रिया के तहत इस पद पर प्रतिनियुक्ति की गई है। इसके बाद से ही विभाग के भीतर विरोध का माहौल बन गया था। सूत्रों के अनुसार, पिछले दस महीनों से विभाग के कई अधिकारी मैडम के प्रति अघोषित असहयोग का रवैया अपनाए हुए थे। नतीजतन, उनकी कार्यप्रणाली और विभागीय समन्वय लगातार प्रभावित होता रहा। आखिरकार सरकार ने इस विवाद का पटाक्षेप करते हुए मैडम को वहां से हटाकर मंत्रालय में उप सचिव के पद पर पदस्थ कर दिया है। इस फैसले के बाद विभाग में राहत और संतोष का माहौल बताया जा रहा है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि लंबे समय से चल रहा गतिरोध अब समाप्त हो गया है।
10 प्रमोटी आईएएस साहब को मिल ही गया ईनाम
एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी ने अपने कलेक्टरी कार्यकाल के दौरान उस जिले की सांसद सीट पर भाजपा की जीत सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जो लंबे समय से कांग्रेस के कब्जे में मानी जाती थी। इसके बाद उनके प्रमोशन के साथ उन्हें मंत्रालय में ऐसी पोस्टिंग दी गई, जिसे प्रशासनिक हलकों में लूप लाइन माना जाता है। उस समय सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया था कि उनके कार्यों का उचित “ईनाम” अवश्य मिलेगा। हालांकि इसके बाद करीब सात महीने तक उनके पास पद तो था, लेकिन कोई विशेष जिम्मेदारी या महत्वपूर्ण कार्यभार नहीं था। इस दौरान साहब ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जल्द उचित जिम्मेदारी देने का आग्रह भी किया था, जिस पर उन्हें पुनः आश्वासन मिला था। अब जाकर वह प्रतीक्षित निर्णय सामने आया है। सरकार ने उन्हें एक बड़े संभाग में कमिश्नर के पद पर पदस्थ कर दिया है।





