एसीएस अपने दोस्त को नहीं दिला सके टेंडर : सीनियर आईपीएस के कारण सरकार की किरकिरी : कलेक्टर साहब को सता रही है पुराने संस्थान की चिंता

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एसीएस अपने दोस्त को नहीं दिला सके टेंडर : सीनियर आईपीएस के कारण सरकार की किरकिरी :  कलेक्टर साहब को सता रही है पुराने संस्थान की चिंता
1 एसीएस अपने दोस्त को नहीं दिला सके टेंडर
एडिशनल चीफ सेक्रेट्री, जो फिलहाल लूप लाइन में पदस्थ हैं, खुद को आमतौर पर बेहद ईमानदार बताते हैं। लेकिन जब बड़े टेंडरों की बात आती है, तो उनकी यह ईमानदारी पीछे छूटती नजर आती है। हाल ही में एक बड़े विभाग ने स्क्रैप बेचने के लिए टेंडर जारी किया। इस टेंडर को हासिल करने के लिए एसीएस के एक करीबी दोस्त ने उनसे संपर्क किया। बताया जाता है कि एसीएस ने विभाग के जूनियर आईएएस अधिकारियों पर अपने दोस्त की कंपनी को टेंडर देने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की। हालांकि, जूनियर अधिकारियों ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया और उन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क करने की सलाह दी। काफी कोशिशों के बावजूद एसीएस अपने दोस्त के लिए टेंडर हासिल नहीं कर पाए।

2 सीनियर आईपीएस के कारण सरकार की किरकिरी
एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के लालच के कारण सरकार की किरकिरी होने की स्थिति बन गई है। बताया जाता है कि कुछ समय पहले अवैध वसूली की शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य की सीमाओं पर लगे नाकों को बंद कराने का निर्णय लिया था। इसी बीच विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा कथित रूप से सांठगांठ कर इस निर्णय के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर करवा दी गई। यह जिन्न लंबे समय से बोतल में बंद था। हाल ही में यह जिन्न तब बाहर आ गया जब विभाग के कमिश्नर के बदलने के बाद इस मामले में सरकार के निर्णय के विपरीत फैसला आ गया। आरोप है कि नए कमिश्नर ने सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं किया, जिसके चलते यह स्थिति बनी। अब इस फैसले के खिलाफ विभिन्न यूनियनों और कुछ केंद्रीय नेताओं द्वारा उच्च स्तर पर शिकायत करने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि यदि इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ अधिक मोर्चाबंदी होती है, तो संबंधित कमिश्नर पर भी कार्रवाई संभव है।

3 कलेक्टर साहब को सता रही है पुराने संस्थान की चिंता
एक युवा आईएएस अधिकारी भले ही अब एक बड़े जिले के कलेक्टर बन गए हों, लेकिन उनका ध्यान अब भी अपने पुराने संस्थान पर टिका हुआ है। बताया जाता है कि उन्होंने उस संस्थान का प्रभार जिस आईएएस अधिकारी को सौंपा है, उन्हें लगातार फोन कर टेंडरों को लेकर पूछताछ करते रहते हैं—किसे टेंडर दिया गया, किसे नहीं। दरअसल, चर्चा है कि पद छोड़ने से पहले उन्होंने कुछ पसंदीदा वेंडरों के हिसाब से शर्तें तय कर टेंडर जारी किए थे। अब उन्हीं कारणों से वे इन प्रक्रियाओं को लेकर असामान्य रूप से चिंतित नजर आ रहे हैं। साहब को लेकर एक और बात भी कही जा रही है। बताया जाता है कि नए जिले में पदभार संभालने से पहले उन्होंने वहां के तत्कालीन कलेक्टर से यह तक पूछ लिया था कि “जिले में मालपानी की व्यवस्था है ना?”

4 युवा आईपीएस को ईमानदारी पड़ी भारी
इन दिनों देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव जारी हैं। इनमें से एक सबसे संवेदनशील राज्य में प्रदेश के एक युवा आईपीएस अधिकारी को ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया गया है। यह अधिकारी अपनी तेज-तर्रार और ईमानदार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं और ऑब्जर्वर के तौर पर भी पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। इसी दौरान, जिस विधानसभा क्षेत्र में उनकी ड्यूटी लगी थी, वहां पुलिस ने कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना पर नाराजगी जताते हुए आईपीएस अधिकारी ने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को फटकार लगा दी। हालांकि, इस फटकार से नाराज पुलिस अधिकारियों ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से कर दी। नतीजतन, आयोग ने आईपीएस अधिकारी को अटैच कर दिया। यानी, उनकी ईमानदारी ही उनके लिए भारी पड़ गई।

5 ज्वॉइन करते ही कलेक्टर साहब बने हंसी का पात्र
हाल ही में एक जिले में पदस्थ हुए युवा आईएएस अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि उन पर किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं चलता। उनका कहना है कि वे वही काम करते हैं जो उन्हें सही लगता है और जो नियमों के दायरे में आता है। इस बयान के बाद प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई अफसर हैरान हैं कि आखिर उन्हें ऐसा बयान देने की जरूरत क्यों पड़ी। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर वे नेताओं की नहीं सुनते, तो फिर इलाके के नेता उनसे नाराज़ होने के बजाए उनकी इतनी तारीफ क्यों करते हैं। कुछ लोग तो मजाक में यह तक कह रहे हैं कि उन्हें राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में जाकर बाकी अफसरों को भी सिखाना चाहिए कि नियमों पर चलते हुए और बिना राजनीतिक दबाव माने, नेताओं को कैसे संतुष्ट रखा जाए। वैसे मजेदार बात तो यह है कि ज्वॉइन करने के बाद जब साहब दौरे पर निकले तो एक गावं में सत्ताधारी दल से जुड़े पंचायत सदस्य और सरपंचों के साथ फोटो सेशन कराते नजर आए।

6 एसपी का गाली देने वाला ऑडियो वायरल 
एक प्रमोटी आईपीएस अधिकारी, जो एसपी के पद पर पदस्थ हैं, का एक आरक्षक को गाली देते हुए ऑडियो इन दिनों वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि संबंधित आरक्षक उनके यहां ड्राइवर के तौर पर तैनात है। दरअसल, आरक्षक ने एसपी को फोन कर पूछा कि उसकी अनुपस्थिति क्यों लगाई गई। इस पर एसपी ने नाराजगी भरे लहजे में जवाब देते हुए कहा कि “अनुपस्थिति नहीं लगाता तो क्या तेरी आरती उतारता? जाकर आरआई से बात कर।” इस जवाब पर आरक्षक ने भी पलटकर कहा कि उसे आरआई से नहीं, सीधे एसपी से ही जवाब चाहिए। इतना सुनते ही एसपी अपना आपा खो बैठे और आरक्षक पर भड़क गए। उन्होंने आरोप लगाया कि वह शराब पीकर फोन कर रहा है और इसके बाद गाली-गलौज करने लगे।गौरतलब है कि इससे पहले भी इसी एसपी का एक और ऑडियो वायरल हो चुका है, जिसमें वे एक सब-इंस्पेक्टर से अभद्र भाषा में बात करते सुनाई दिए थे।

7 लौट कर बुद्धू घर को आए
एक बड़े और संवेदनशील विभाग में मुखिया की पदस्थापना को लेकर अजीब स्थिति बनी हुई है। विभाग के नियमित मुखिया जब बीमारी के कारण छुट्टी पर गए, तो लूप लाइन में पदस्थ एक एसीएस को अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया। शुरुआत में उन्होंने फंड से जुड़ी फाइलें तेजी से निपटाईं, लेकिन जैसे ही काम का दबाव बढ़ा, वे भी छुट्टी पर चले गए। इसके बाद विभाग का जिम्मा एक अन्य एसीएस को दिया गया, लेकिन उन्होंने भी कुछ ही समय में अवकाश ले लिया। इस तरह विभाग के अनाथ होने की स्थिति बन ही रही थी कि दूसरे वाले एसीएस छुट्टी से लौट आए। उन्हें उम्मीद थी कि तब तक विभाग में किसी स्थायी अधिकारी की पदस्थापना हो चुकी होगी। लेकिन किस्मत कुछ और ही थी—जैसे ही वे लौटे, उन्हें फिर से उसी विभाग का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया। अब साहब बेमन से ही सही, लेकिन विभाग का कामकाज संभालने में जुटे हुए हैं।

8 रिटायर होने वाले आईपीएस को चार्ज
एक प्रमोटी आईपीएस अधिकारी इसी महीने रिटायर होने वाले हैं। वहीं, उनके एक साथी अधिकारी अगले महीने तक अवकाश पर जा रहे हैं। ऐसे में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने अवकाश पर जाने वाले आईपीएस का प्रभार उस अधिकारी को सौंपने की नोटशीट आगे बढ़ा दी, जो खुद इसी महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं। हालांकि, आदेश जारी होने से पहले ही एक अन्य अधिकारी की नजर इस नोटशीट पर पड़ गई। इसके बाद आनन-फानन में नोटशीट में बदलाव किया गया और नई नोटशीट जारी की गई। अगर समय रहते यह गलती पकड़ में नहीं आती और आदेश जारी हो जाते, तो विभाग को अनावश्यक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता था।

9 पीएस के लौटने पर अफसरों ने ली राहत की सांस
एक मलाईदार विभाग के प्रमुख सचिव अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच खासे लोकप्रिय नहीं थे। बावजूद इसके, यह कहावत यहां भी सच साबित हुई कि “पुराना बॉस ही बेहतर लगता है। दरअसल, जब प्रमुख सचिव प्रशिक्षण पर गए, तो विभाग का अतिरिक्त प्रभार एक तेज-तर्रार एसीएस मैडम को सौंपा गया। लेकिन मैडम ने साफ तौर पर कह दिया कि वे इस विभाग की फाइलों पर काम नहीं करेंगी। नतीजा यह हुआ कि विभाग का कामकाज ठप पड़ने लगा और कई महत्वपूर्ण फाइलें अटक गईं।स्थिति ऐसी बनी कि अधिकारी-कर्मचारी अपने पुराने बॉस को ही याद करने लगे। उनका कहना था कि “जैसे भी थे, कम से कम काम तो नहीं रोकते थे, लेकिन मैडम तो हमारी शक्ल तक देखना पसंद नहीं करतीं। अब जब प्रमुख सचिव प्रशिक्षण से लौट आए हैं, तो विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है।

10 एसपी साहब को मिलने वाला है काम का ईनाम
एक बड़े जिले में पदस्थ युवा एसपी साहब इन दिनों खूब चर्चा में हैं। वजह है उनका लगातार नवाचार करना और हर वक्त एक्टिव नजर आना। चाहे फोन उठाना हो या सीधे जनता के बीच पहुंचना—साहब हर मोर्चे पर मौजूद रहते हैं। अब खबर गलियारों में यह तैर रही है कि उनकी इसी सक्रियता का इनाम उन्हें जल्द मिलने वाला है। चर्चा है कि साहब का नाम मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवार्ड के लिए लगभग तय हो चुका है और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। अब बस औपचारिक घोषणा का इंतजार है। जैसे ही सूची जारी होगी, उसमें साहब का नाम दिखे तो चौंकिएगा मत—क्योंकि इस बार मेहनत रंग लाने वाली है।

Abhishek Dubey

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