छुट्टी पर गए एसीएस को बना दिया विभाग का मुखिया : सिंह साहब का ‘किंग’ बनना लगभग तय : आख़िर कहां गया युवा आईएएस का निलंबन आदेश?
छुट्टी पर गए एसीएस को बना दिया विभाग का मुखिया : सिंह साहब का ‘किंग’ बनना लगभग तय : आख़िर कहां गया युवा आईएएस का निलंबन आदेश?

1 छुट्टी पर गए एसीएस को बना दिया विभाग का मुखिया
प्रदेश सरकार से पिछले दिनों एक बड़ी प्रशासनिक चूक हो गई, जिसकी चर्चा अब अफसरों के गलियारों में जमकर हो रही है। मामला एक बेहद बड़े और संवेदनशील विभाग का है। विभाग के मुखिया एसीएस साहब लंबे अवकाश पर चले गए। सरकार ने जल्दबाजी में एक दूसरे एसीएस को अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी। कुछ ही दिनों बाद नए प्रभारी एसीएस साहब भी छुट्टी पर रवाना हो गए। इसके बाद सरकार ने लूप लाइन में चल रहे एक एसीएस को विभाग का अतिरिक्त चार्ज थमा दिया। बस यहीं पर सरकार से बड़ी चूक हो गई। जब विभाग के अफसर फाइलें लेकर नए प्रभारी साहब तक पहुंचे और फाइलें वापस नहीं लौटीं तो खोजबीन शुरू हुई। तब पता चला कि साहब तो पहले से ही लंबे अवकाश पर हैं और नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों की सैर पर निकले हुए हैं। अब हालात यह हैं कि विभाग तीन-तीन एसीएस के भरोसे झूल रहा है और फाइलें टेबल से टेबल घूम रही हैं। देखना दिलचस्प होगा कि इन तीन में से कोई एसीएस लौटकर कुर्सी संभालता है या फिर सरकार किसी चौथे आईएएस को विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपकर इस गुत्थी को सुलझाती है।
2 सिंह साहब का ‘किंग’ बनना लगभग तय
सरकार को सबसे ज़्यादा राजस्व दिलाने वाले अहम विभाग के कमिश्नर की कुर्सी जल्द ही खाली होने जा रही है। मौजूदा कमिश्नर—जो कि सीनियर आईपीएस अफसर हैं—एक साल की स्टडी लीव पर जाने की तैयारी में हैं। उनके जाते ही इस हाई-प्रोफाइल कुर्सी को लेकर अफसरशाही में हलचल तेज़ हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, कई अफसर इस कुर्सी तक पहुँचने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रहे हैं, लेकिन फिलहाल इस दौड़ में सिंह साहब सबसे आगे बताए जा रहे हैं। भले ही वे इस समय भी एक अहम पद पर काबिज़ हों, लेकिन कमिश्नर बनना अधिकांश आईपीएस अफसरों का सपना होता है—और सिंह साहब का यह सपना अब साकार होता दिख रहा है। अफसरशाही के गलियारों में चर्चा है कि सिंह साहब का ‘किंग’ बनना लगभग फाइनल माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि उनके मौजूदा पद के लिए उत्तराधिकारी की तलाश भी अंदरखाने शुरू हो चुकी है। यानी इशारे साफ हैं—ताजपोशी बस औपचारिक ऐलान की मोहताज है।
3 आख़िर कहां गया युवा आईएएस का निलंबन आदेश?
पिछले दिनों एक बड़े शहर में हुई दर्दनाक घटना में डेढ़ दर्जन लोगों की मौत ने सरकार को कटघरे में ला खड़ा किया। मामले की आंच जब प्रशासन तक पहुँची तो सरकार ने आनन-फानन में एक युवा आईएएस अफसर को पद से हटा दिया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली दरबार से इस मामले में नाराज़गी जताए जाने के बाद सरकार ने उसी युवा आईएएस को निलंबित करने का फैसला भी कर लिया। इस पूरे प्रकरण में कुछ आईएएस अफसरों को हटाया गया तो कुछ को नई पोस्टिंग दे दी गई। ये सभी आदेश सरकार ने बाकायदा सार्वजनिक भी कर दिए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि निलंबन का आदेश कहीं दिखाई नहीं दे रहा। न विभागीय वेबसाइट पर, न सरकार के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में—और न ही किसी और सरकारी प्लेटफॉर्म पर। जैसे आदेश जारी हुआ ही नहीं… या फिर जारी होकर ‘गायब’ हो गया। अब अफसरशाही के गलियारों में यही चर्चा है कि सरकार ने आख़िर इस निलंबन आदेश को सार्वजनिक क्यों नहीं किया? इसके पीछे सरकार की मंशा क्या है? कुछ अफसर तो चुटकी लेते हुए यह तक कह रहे हैं कि दिल्ली दरबार की फटकार के बावजूद क्या सचमुच युवा आईएएस को निलंबित किया गया है, या फिर सिर्फ सोशल मीडिया पर निलंबन की खबरें चलवाकर मामला ठंडा करने की कोशिश की गई?
4 दो सीनियर आईपीएस अफसरों को पोस्टिंग का इंतजार
केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति से प्रदेश लौटे दो सीनियर आईपीएस अफसर इन दिनों खासे बेचैन बताए जा रहे हैं। वजह साफ है—वापसी को करीब एक महीना होने जा रहा है, लेकिन अब तक दोनों को कोई ठोस पोस्टिंग नसीब नहीं हुई है। फाइलें चल रही हैं, चर्चाएं हैं, लेकिन कुर्सी अभी दूर है। सूत्रों की मानें तो सरकार फिलहाल इनमें से एक अफसर को “लूप लाइन” माने जाने वाले किसी संस्थान में एडजस्ट कर सकती है। इसके पीछे भी अपनी ही कहानी है। मौजूदा इंटेलिजेंस एडीजी सात–आठ महीने में रिटायर होने वाले हैं और माना जा रहा है कि उनकी कुर्सी के लिए इन्हीं दोनों में से एक नाम लगभग तय है। हालांकि तब तक इंतजार करना दोनों अफसरों को रास नहीं आ रहा। अंदरखाने दोनों की यही गुजारिश सुनने को मिल रही है—“जहां देना हो, दे दीजिए… लेकिन जल्दी दीजिए।”
5 ज्वाइंट डायरेक्टर मैडम के अरमानों को लगा झटका
एक अहम विभाग में कभी खासा रसूख रखने वाली ज्वाइंट डायरेक्टर मैडम इन दिनों निराशा के दौर से गुजर रही हैं। रिटायरमेंट के बाद से ही मैडम की कोशिश रही कि किसी न किसी रूप में संविदा पर विभाग में वापसी हो जाए, लेकिन अब तक उनकी यह चाहत पूरी होती नजर नहीं आ रही है। बताया जा रहा है कि विभाग के सीनियर अफसरों से लेकर “बड़े साहब” तक मैडम की विवादित कार्यशैली और छवि से भली-भांति परिचित हैं। यही वजह है कि फाइलें आगे बढ़ने के बजाय वहीं अटक जा रही हैं। रिटायरमेंट से ठीक पहले तक मैडम को पूरा भरोसा था कि उनकी वापसी महज़ औपचारिकता भर होगी। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, यह भरोसा हकीकत से टकराता दिख रहा है। राजधानी में विभिन्न संस्थानों में पदस्थ रहते हुए मैडम ने न सिर्फ जमकर कमाई की, बल्कि प्रॉपर्टी में भी मोटा निवेश किया। कहा जाता है कि उनके रास्ते जो भी आया, उसे निपटाने में मैडम ने कभी देर नहीं की। एक वक्त ऐसा भी था जब अच्छे-अच्छे आईएएस अफसर तक उनके रसूख के आगे पानी मांगते नजर आते थे। अब हालात यह हैं कि वही रसूख मैडम की वापसी का रास्ता आसान करने के बजाय, उनके अरमानों पर ही भारी पड़ता दिखाई दे रहा है।
6 अफसरों की सीआर में सरकार–बड़े साहब की जुगलबंदी
आईएएस अफसरों की सीआर यानी गोपनीय चरित्रावली आखिरकार लिख दी गई है। इस बार सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिन मामलों में आमतौर पर सरकार और बड़े साहब की राय अलग-अलग दिशा में जाती दिखती है, वहां दोनों के बीच गजब का सामंजस्य नजर आया। सूत्रों की मानें तो सरकार ने लगभग वही सीआर फाइनल की है, जो बड़े साहब की तरफ से भेजी गई थी। यानी न ज्यादा काट-छांट, न कोई बड़ा फेरबदल। यह स्थिति कई अफसरों के लिए चौंकाने वाली भी रही, क्योंकि अब तक यह माना जाता रहा है कि दोनों की सोच अधिकांश मामले में अक्सर टकरा जाती है। लेकिन इस ‘परफेक्ट तालमेल’ के पीछे भी एक अंदरूनी कहानी है। बताया जा रहा है कि सरकार के दो बेहद करीबी अफसरों ने पर्दे के पीछे रहकर इस समन्वय की पटकथा लिखी। इन्हीं दोनों की सक्रिय भूमिका के चलते सरकार और बड़े साहब के बीच सीआर को लेकर कोई समन्वय की कमी सामने नहीं आई।
7 रिटायर्ड आईएएस ने बताया कार्रवाई को साजिश
पिछले दिनों आरक्षित वर्ग से जुड़ी एक प्रभावशाली संस्था के अध्यक्ष बने एक प्रमोटी आईएएस उस वक्त सुर्खियों में आ गए, जब उन्होंने एक समाज विशेष के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक बयान दे दिया। अब दो महीने बाद इसे मामले में आईएएस अफसरों के बीच फिर बहस शुरू हो गई है। दरअसल, उसी संस्था के पूर्व अध्यक्ष रह चुके एक रिटायर्ड आईएएस ने अब इस पूरे प्रकरण को लेकर बड़ा बयान दे डाला है। उन्होंने आईएएस अफसरों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में लिख दिया कि बयान देने वाले अफसर के खिलाफ सुनियोजित साजिश रची गई है और उन्हें जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है। रिटायर्ड अफसर की यह टिप्पणी ग्रुप में पड़ते ही बहस की चिंगारी फिर भड़क उठी। दूसरे खेमे ने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई और लिखा कि इस मामले में उनके पास भी कहने के लिए बहुत कुछ है। बस अनुमति मिल जाए, तो कई परतें खोली जा सकती हैं। हालात बिगड़ते देख एसीएस रैंक के एक सीनियर आईएएस को बीच में दखल देना पड़ा। उन्होंने दोनों ही पक्षों से साफ शब्दों में कहा कि इस मुद्दे पर अब कोई भी कुछ न लिखे। फिलहाल ग्रुप शांत है, लेकिन अंदरखाने खलबली अब भी बनी हुई है।
8 आईपीएस के लिए एडीएम रैंक के अफसर ने खाली किया बंगला
कई महीनों से आवास को लेकर परेशान चल रहे एक युवा आईपीएस को आखिरकार प्रदेश की आर्थिक राजधानी में सरकारी बंगला नसीब हो ही गया। यह वही बंगला है, जिस पर अब तक एक एडीएम रैंक के प्रशासनिक अफसर का कब्ज़ा चला आ रहा था। बताया जाता है कि तमाम प्रयासों के बावजूद यह अफसर बंगला खाली करने को तैयार नहीं था। हैरानी की बात यह है कि संबंधित अफसर ने धार्मिक नगरी में भी एक सरकारी आवास ले रखा था, इसके बावजूद आर्थिक राजधानी का यह कीमती बंगला छोड़ने की कोई जल्दी नहीं दिखा रहा था। अफसर का रसूख ऐसा बताया जा रहा है कि बड़े-बड़े अधिकारी भी उस पर बंगला खाली कराने का दबाव नहीं बना पा रहे थे। महीनों तक फाइलें घूमती रहीं, लेकिन मामला जस का तस बना रहा। आखिरकार लगातार कोशिशों के बाद युवा आईपीएस ने बाज़ी मार ली और बंगला खाली करवा लिया।
9 मंत्री की खिलाफ़त, फिर भी अफसर की वापसी की तैयारी
प्रदेश के एक बेहद कद्दावर और ताक़तवर मंत्री ने पदभार संभालते ही अपने विभाग में वर्षों से राजधानी में जमे एक अफसर को हटाकर करीब पाँच सौ किलोमीटर दूर पोस्टिंग दे दी। अफसर भले ही पद में अदना था, लेकिन विभाग की असली कमान उसी के हाथों में मानी जाती थी। कौन अफसर कहाँ रहेगा, किसके खिलाफ़ जांच चलेगी और किस पर मेहरबानी होगी—यह सब उसी की मर्ज़ी से तय होता था। सज़ा और इनाम का पैमाना भी वही तय करता रहा है। मंत्री के सख़्त रुख के बाद अफसर ने राजधानी में बने रहने के लिए कई बार मनुहार की, लेकिन हर कोशिश नाकाम रही। आखिरकार उसे दूर भेज दिया गया। अब खबर है कि यह अफसर मंत्री की इच्छा के ठीक उलट राजधानी वापसी की तैयारी में जुट गया है। सियासी और प्रशासनिक गलियारों में उसके लिए फिर से ज़मीन तैयार की जा रही है। यदि सब कुछ योजना के मुताबिक़ रहा, तो जल्द ही यह अफसर एक बार फिर राजधानी में दिख सकता है—और पहले की तरह रसूख के साथ विभाग की बागडोर संभालता हुआ। गॉसिप गलियारों में फिलहाल यही चर्चा है कि मंत्री की नाराज़गी के बावजूद अफसर की वापसी लगभग तय मानी जा रही है।
10 आखिरकार हटाए गए आईपीएस अफसरों पर भारी टीआई
प्रदेश के सबसे मलाईदार जिले के सबसे कीमती थाने से आखिरकार एक बेहद रसूखदार टीआई की बिदाई हो ही गई। बीते करीब दस साल से इसी थाने में जमे इस टीआई का प्रभाव इतना था कि उसे हटाना किसी बड़े ऑपरेशन से कम नहीं रहा। बताया जाता है कि टीआई की कारगुजारियों को लेकर जिले के एसपी से लेकर डीआईजी और आईजी तक को एक के बाद एक शिकायतें पुलिस मुख्यालय भेजनी पड़ीं। इसके बावजूद लंबे समय तक यह अफसर अपनी कुर्सी पर जमा रहा। मामला तब विस्फोटक हुआ जब एक नेताजी ने खुलेआम एक व्यापारी की पिटाई कर दी। इस घटना की एफआईआर दर्ज करने से टीआई ने साफ इनकार कर दिया, जबकि एसपी समेत तमाम वरिष्ठ अधिकारी उसे बार-बार निर्देश देते रहे। हालात इतने बिगड़े कि एसपी को मजबूरन जिले के ही एक दूसरे थाने में नेताजी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी पड़ी। आखिरकार पुलिस मुख्यालय ने सख्ती दिखाई और टीआई को लाइन अटैच कर दिया गया। टीआई की विदाई के साथ ही जिले में जश्न का माहौल बन गया। आतिशबाज़ी हुई और मिठाइयां तक बांटी गईं।





