मुख्यमंत्री की बैठक में नाराज हुई एसीएस मैडम : सीनियर आईपीएस साहब ने बहाई की ज्ञान की गंगा : आईएएस मैडम के तेवर चर्चा में

मध्यप्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में हलचल तेज! मुख्यमंत्री की बैठक में ACS मैडम की नाराजगी से लेकर IPS अफसरों की ज्ञानगंगा और IAS मैडम के सख्त तेवर तक… पढ़ें सत्ता और सिस्टम के अंदर की 10 बड़ी चर्चाएं।
मुख्यमंत्री की बैठक में नाराज हुई एसीएस मैडम : सीनियर आईपीएस साहब ने बहाई की ज्ञान की गंगा : आईएएस मैडम के तेवर चर्चा में
1 मुख्यमंत्री की बैठक में नाराज हुई एसीएस मैडम
मुख्यमंत्री की हाल ही में सीनियर आईएएस अफसरों के साथ हुई समीक्षा बैठक में उस वक्त दिलचस्प माहौल बन गया, जब अपनी तेज-तर्रार और ईमानदार छवि के लिए पहचानी जाने वाली एक एसीएस मैडम अचानक नाराज हो गईं। मामला कुछ महीने पहले हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का था। मैडम ने खुलकर कहा कि आयोजन में अव्यवस्थाएं इतनी ज्यादा थीं कि कार्यक्रम के दौरान एसी की तेज आवाज में मंच से कौन क्या बोल रहा है, ठीक से सुनाई ही नहीं दे रहा था। हालत यह रही कि वह कुछ देर बाद कार्यक्रम छोड़कर ही बाहर निकल गईं। दिलचस्प बात यह रही कि जब मैडम अपनी नाराजगी जाहिर कर रही थीं, तब संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव ठीक उनके बगल में बैठे सब सुन रहे थे। इसके अलावा मैडम ने कहा कि सिर्फ बीस प्रतिशत घरों तक पानी पहुंच रहा है 80 प्रतिशत लोग तो अब भी कुओं से पानी भरकर ले जा रहे हैं। लेकिन मैडम यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने यह भी कह दिया कि बंद कमरों में होने वाली इस बैठक की जानकारी मीडिया को नहीं लगनी चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री ने तंज कसा कि आप यदि ऐसा बोलोगी कि इस बैठक की जानकारी मीडिया में नहीं छपनी चाहिए तो और ज्यादा छपेगी। इस बात पर अन्य अफसर भी मुस्कुराने लगे।

2 सीनियर आईपीएस साहब ने बहाई की ज्ञान की गंगा
पिछले दिनों एक बड़े और संवेदनशील विभाग के एसीएस पुलिस अफसरों को दिए जाने वाले मेडल्स की सूची को लेकर सीनियर आईपीएस अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। मामला काफी गंभीर था, लेकिन सबको लग रहा था कि बैठक जल्दी निपट जाएगी, क्योंकि एक सीनियर आईपीएस साहब पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे और सूची पर ज्यादा कांटछांट की गुंजाइश भी नहीं दिख रही थी।
इसी बीच अचानक एक दूसरे सीनियर आईपीएस साहब की एंट्री हुई और फिर बैठक का पूरा माहौल ही बदल गया। साहब ने आते ही ऐसा ज्ञान देना शुरू किया कि कमरे में बैठे बाकी अफसरों को आखिरकार चुप्पी साधनी पड़ गई। दिलचस्प बात यह रही कि जिस विषय पर वह लंबा-चौड़ा भाषण दे रहे थे, उससे उनका दूर-दूर तक कोई सीधा लेना-देना नहीं था। लेकिन हर मामले में खुद को सबसे ज्यादा जानकार साबित करने की आदत ने उन्हें बोलने से रोका नहीं।
सूत्र बताते हैं कि साहब की इस ‘ज्ञानगंगा’ का असर यह हुआ कि मेडल की सूची में शामिल कुछ एएसपी और डीएसपी स्तर के अफसरों के नाम आखिरी वक्त में कट भी गए। 

3 आईएएस मैडम के तेवर चर्चा में 
सचिव स्तर की एक महिला आईएएस अफसर इन दिनों अपने जबरदस्त तेवरों की वजह से पूरे विभाग में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालात ऐसे हैं कि मैडम कब किस अफसर या कर्मचारी को फटकार लगा दें और किस फाइल पर कौन-सी आपत्ति ठोक दें, इसका अंदाजा शायद खुद मैडम को होता है… या फिर भगवान को। बताया जाता है कि मैडम ने अब सख्ती का स्तर और बढ़ा दिया है। हाल ही में एक बैठक के दौरान उन्होंने बाबुओं से सीधे सवाल दागना शुरू कर दिया— “इस फाइल पर कितने रुपये मिले हैं? दो सौ या पांच सौ?” भरी बैठक में ऐसा सवाल सुनते ही संबंधित बाबू शर्म से पानी-पानी हो जाते हैं और कमरे में सन्नाटा पसर जाता है। मैडम के तेज तेवरों के सामने किसी की हिम्मत नहीं पड़ती कि पलटकर कुछ कह सके। ऐसे में बेचारे बाबुओं के पास चुपचाप सुनने के अलावा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं बचता। विभाग के गलियारों में अब चर्चा इस बात की है कि मैडम की मीटिंग में जाने से पहले लोग फाइलों से ज्यादा अपने जवाब तैयार करने लगे हैं।

4 एमडी साहब का फरमान दोगुना कर दो बिल
खरीदी से जुड़े एक बड़े निगम के एमडी साहब इन दिनों अपने संस्थान में काम कर रही आउटसोर्स कंपनी से खासे नाराज बताए जा रहे हैं। वजह बना हाल ही में आयोजित एक बड़ा इवेंट। सूत्रों के मुताबिक, कार्यक्रम का कुल बिल करीब ढाई करोड़ रुपये बना था, लेकिन साहब की इच्छा कुछ और ही थी। बताया जाता है कि उन्होंने कंपनी के जिम्मेदार लोगों को साफ निर्देश दे दिए कि बिल को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये का बनाया जाए। लेकिन कंपनी ने यह ‘गणित’ मानने से इनकार कर दिया। बस फिर क्या था, एमडी साहब का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। खबर है कि उन्होंने दो टूक अंदाज में कह दिया कि कंपनी को वही करना होगा, जैसा साहब चाहते हैं। इतना ही नहीं, नाराज साहब ने यह तक संकेत दे दिए कि जल्द ही कंपनी का ठेका निरस्त किया जा सकता है और फिर नए टेंडर निकालकर किसी दूसरी कंपनी को काम सौंप दिया जाएगा।

5 सिविल सर्जन के रसूख के आगे बेबस सीनियर अफसर
एक बड़े शहर के सरकारी अस्पताल में पदस्थ एक सिविल सर्जन इन दिनों पूरे स्वास्थ्य महकमे में चर्चा का विषय बने हुए हैं। वजह सिर्फ उनका पद नहीं, बल्कि उनका वह ‘रसूख’ है, जिसकी चर्चा खुद वह बड़े गर्व से करते फिरते हैं। साहब खुलेआम कहते हैं कि वे प्रदेश के सबसे बड़े साहब के बेहद खास हैं और उनकी पोस्टिंग भी सीधे ऊपर से ही कराई गई है। हालात यह हैं कि पिछले एक महीने में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कई बार अस्पताल का औचक निरीक्षण कर चुके हैं। निरीक्षण में तमाम खामियां भी सामने आईं, लेकिन कार्रवाई करना तो दूर, सिविल सर्जन साहब को नोटिस देने की हिम्मत तक कोई नहीं जुटा पाया। अब अस्पताल के गलियारों में यही चर्चा गर्म है कि आखिर सीनियर अफसर कब तक इस ‘खासमखास’ सिविल सर्जन पर मेहरबानी बनाए रखेंगे। वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि जब ऊपर तक सीधी पकड़ हो, तो फिर नोटिस और कार्रवाई जैसी चीजें सिर्फ फाइलों में ही अच्छी लगती हैं।

6 आईपीएस साहब का प्रमोशन आदेश निकलने में हुई देरी
एक आईपीएस साहब को हाल ही में डीआईजी पद पर प्रमोशन तो मिल गया, लेकिन इस खुशी पर विभागीय सुस्ती का हल्का सा साया भी पड़ गया। वजह यह रही कि साहब के प्रमोशन आदेश जारी होने में करीब दो सप्ताह की देरी हो गई। सूत्र बताते हैं कि पूरी कहानी एक बाबू के टेबल से शुरू होकर वहीं अटक गई। साहब की फाइल कई दिनों तक बाबूजी के पास धरी रही और आदेश, जो पिछले महीने के आखिरी दिन तक निकल जाने चाहिए थे, आखिरकार दो हफ्ते बाद जारी हो पाए। दिलचस्प बात यह है कि विभाग में लंबे समय बाद ऐसा मामला देखने को मिला है। वरना परंपरा तो यही रही है कि महीने के अंतिम दिन प्रमोशन आदेश किसी भी हालत में बाहर आ ही जाते हैं। अब महकमे के गलियारों में चर्चा इस बात की है कि आखिर बाबूजी की व्यस्तता ज्यादा थी या फाइल की किस्मत थोड़ी कमजोर निकल गई।

7 रिटायर्ड आईएएस ने शुरू किया स्कूल
“कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती…” — शायद इसी लाइन को अपना लाइफ मंत्र मान चुके हैं एक रिटायर्ड आईएएस साहब। फर्क बस इतना है कि साहब की हर नई कोशिश फिलहाल उन्हें सफलता से ज्यादा सुर्खियां ही दिला रही है। कुछ समय पहले साहब ने बड़े जोश के साथ पार्टनरशिप में पेट्रोल पंप का कारोबार शुरू किया था। शुरुआत में लगा था कि प्रशासनिक अनुभव अब बिजनेस में भी कमाल दिखाएगा, लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। देखते ही देखते कारोबार में इतना घाटा हुआ कि कुछ ही महीनों में पेट्रोल पंप पर ताला लगाना पड़ गया। लंबे समय तक शांत रहने के बाद अब साहब ने एक नई पारी शुरू कर दी है। इस बार मैदान है एजुकेशन का। साहब ने स्कूल खोल दिया है। हालांकि यहां भी राह आसान नहीं रही। परमिशन से लेकर व्यवस्थाओं तक, शुरुआत में कई अड़चनें सामने आईं और मामला लंबे समय तक अटका रहा। लेकिन साहब भी आखिर ठहरे जिद्दी खिलाड़ी। तमाम परेशानियों को पार करते हुए अब स्कूल की शुरुआत हो चुकी है।

8 भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसी में मैडम का जलवा
भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एक एजेंसी में इन दिनों एक राज्य प्रशासनिक सेवा की एडीएम रैंक की अफसर के जबरदस्त जलवे चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालात ऐसे बताए जाते हैं कि दफ्तर में पेन से लेकर कंप्यूटर, गाड़ी और दूसरी जरूरी सुविधाओं तक के लिए अफसरों और कर्मचारियों को पहले मैडम के दरबार में हाजिरी लगानी पड़ती है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि अगर मैडम का मूड ठीक हो गया तो मिनटों में काम हो जाता है, लेकिन अगर उनका पारा चढ़ा हो तो बड़े से बड़ा अधिकारी भी फाइल लेकर चक्कर काटता रह जाता है। एजेंसी में आने वाले नए अफसर शुरुआत में व्यवस्था बदलने का दम भरते जरूर हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में उन्हें भी समझ आ जाता है कि यहां असली पकड़ किसकी है।दिलचस्प बात यह है कि इस एजेंसी में कई बड़े अफसर आए, तबादले हुए और कई रिटायर भी हो गए, लेकिन मैडम की कुर्सी पर कभी आंच नहीं आई। दफ्तर के गलियारों में तो लोग मजाक में उन्हें “स्थायी व्यवस्था” तक कहने लगे हैं। उनकी पकड़ ऐसी बताई जाती है कि बिना उनकी मर्जी के कोई छोटी से छोटी खरीद तक आगे नहीं बढ़ती। अंदरखाने चर्चा यह भी है कि मैडम ने वर्षों में ऐसा नेटवर्क तैयार कर लिया है कि हर कोई उनसे बनाकर रखने में ही अपनी भलाई समझता है। यही वजह है कि उन्हें हटाने या उनके अधिकार कम करने की कोशिशें हमेशा फाइलों तक ही सीमित रह जाती हैं।

9 शराब छुड़ाने के लिए एसपी मैडम का गजब नुस्खा
जिले की नई नवेली युवा एसपी मैडम इन दिनों हर तरफ चर्चा में हैं। वजह सिर्फ उनकी सख्ती नहीं, बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों से सीधे संवाद करने का उनका अलग अंदाज भी है। कम समय में ही मैडम ने अपनी खास पहचान बना ली है और अब उनकी जनसंवाद बैठकों के किस्से चौपालों से लेकर सोशल मीडिया तक पहुंचने लगे हैं। हाल ही में एक गांव में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान मैडम ने महिलाओं से खुलकर बातचीत की। बातचीत के बीच जब मुद्दा पुरुषों की शराबखोरी पर आया तो एसपी मैडम ने ऐसा नुस्खा दे डाला कि वहां मौजूद महिलाएं भी मुस्कुरा उठीं। मैडम ने हंसते हुए कहा, “जब भी आपके पति शराब पीकर घर आएं तो उन्हें खाना देने से मना कर दीजिए… धीरे-धीरे आदत खुद छूट जाएगी।” इतना कहते ही सभा में ठहाके गूंज उठे। फिर मैडम ने मजाकिया अंदाज में जोड़ा, “हालांकि मेरी इस सलाह के बाद आपके पति मुझसे जरूर नाराज हो सकते हैं।” यही नहीं, मैडम ने महिलाओं को सड़क सुरक्षा का जिम्मा भी सौंप दिया। उन्होंने कहा कि अगर पति दोपहिया वाहन लेकर घर से निकलें तो बिना हेलमेट उन्हें बाहर न जाने दें। 

10 घेराबंदी से फूल गए युवा आईएएस के हाथ पांव
नगर निगम के एक युवा आईएएस अफसर इन दिनों खासे चर्चा में हैं, लेकिन वजह उनकी तारीफ नहीं बल्कि कार्यप्रणाली को लेकर बढ़ती नाराजगी है। बड़े निगम में एडिशनल कमिश्नर की जिम्मेदारी संभाल रहे साहब पर आरोप है कि वे न तो मोबाइल रिसीव करते हैं और न ही जनप्रतिनिधियों से ज्यादा संवाद करना पसंद करते हैं। ऐसे में गर्मी बढ़ते ही पानी संकट ने पार्षदों का पारा भी चढ़ा दिया। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग वार्डों में पानी व्यवस्था बिगड़ने लगी थी। पार्षदों ने पहले शांति से साहब तक अपनी समस्याएं पहुंचाईं और हालात सुधारने की मांग की, लेकिन जब उन्हें लगा कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, तब मामला अचानक गर्मा गया। फिर क्या था… एक दिन कई पार्षद एक साथ सीधे साहब के चैंबर में जा पहुंचे। अचानक इतने जनप्रतिनिधियों को सामने देख युवा आईएएस के भी हाथ-पांव फूल गए। चैंबर के भीतर माहौल ऐसा बना कि पार्षद बारी-बारी नहीं, बल्कि एक साथ अपनी नाराजगी जाहिर करने लगे। सूत्र बताते हैं कि साहब बीच-बीच में कुछ समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन हर बार पार्षदों की ऊंची आवाजें उन पर भारी पड़ती रहीं। काफी देर तक चली इस गर्मागर्म बातचीत के बाद आखिरकार साहब ने जल्द पानी व्यवस्था सुधारने का भरोसा दिया।

Abhishek Dubey

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A journalist with more than 15 years of experience in investigative reporting

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